जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि नारी शक्ति का विकास केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और राष्ट्र के लिए अनिवार्य है। उन्होंने युवा पीढ़ी को निडर होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
राज्यपाल के संबोधन के मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक प्रेरणा: राज्यपाल ने रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि साहस और वीरता के लिए उम्र मायने नहीं रखती। जिस तरह उन्होंने छोटी आयु में अंग्रेजों को चुनौती दी, वैसे ही आज की युवा महिलाएं भी किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं।
समानता का संदेश: उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाएं पुरुषों के समान हैं और आज वे हर पेशेवर क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर रही हैं।
सकारात्मकता और संकल्प: उन्होंने छात्रों से कहा कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और दृष्टिकोण सकारात्मक हो, तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से 'भयमुक्त' रहकर अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को 'मानद डिग्री' (Honorary Degree):
समारोह के दौरान एक विशेष क्षण तब आया जब विश्वविद्यालय ने राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी को उनके सामाजिक और सामुदायिक सेवा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए मानद डिग्री से सम्मानित किया।
शिक्षा पर दीया कुमारी के विचार:
राष्ट्र की नींव: उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव रखती है।
बालिका शिक्षा: उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा और उन्हें समान अवसर प्रदान करने पर जोर दिया, ताकि वे सामाजिक प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
सशक्तिकरण: उन्होंने माना कि महिलाओं को शिक्षित करना केवल उन्हें साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
समारोह का महत्व:
दीक्षांत समारोह न केवल डिग्रियां बांटने का अवसर था, बल्कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा युवा छात्राओं को यह विश्वास दिलाने का भी प्रयास था कि राजस्थान सरकार उनके शैक्षिक और सामाजिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है।
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