मुंबई (4 अप्रैल 2026): पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब भारतीय कॉरपोरेट जगत के बही-खातों पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बढ़ती ईंधन कीमतों और बाधित होती सप्लाई चेन के कारण भारतीय कंपनियों के मुनाफे में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 15% तक की गिरावट आ सकती है।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
प्रभावित क्षेत्र: एयरलाइंस, पेंट, उर्वरक (Fertilizers) और तेल रिफाइनरी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास रहने से इन उद्योगों की मार्जिन (Margins) पर दबाव बढ़ गया है।
लॉजिस्टिक्स लागत: स्वेज नहर और लाल सागर के रास्तों में असुरक्षा के कारण माल ढुलाई का समय और भाड़ा 40% तक बढ़ गया है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) प्रभावित हो रही है।
सरकारी राहत: भारत सरकार ने पश्चिम एशिया से कच्चे माल पर निर्भर उद्योगों (जैसे प्लास्टिक और टेक्सटाइल) को राहत देने के लिए पेट्रोकेमि
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