नयी दिल्ली: कांग्रेस ने बुधवार को मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को कमजोर किया गया है। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि ₹1,000 की मासिक पेंशन आज के महंगाई के दौर में किसी भी बुजुर्ग के लिए गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है।

जयराम रमेश और कांग्रेस के मुख्य आरोप:

  • महंगाई का बोझ: जयराम रमेश के अनुसार, स्वास्थ्य खर्च और रोजमर्रा की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ चुके हैं, लेकिन न्यूनतम पेंशन लंबे समय से जस की तस बनी हुई है।

  • सामाजिक सुरक्षा में गिरावट: कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की "खराब नीतियों" के कारण बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मिलने वाली सहायता अब अपर्याप्त हो गई है।

  • संसदीय समिति का ढाल: उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खुद भाजपा सांसद की अध्यक्षता वाली समिति ने माना है कि ₹1,000 की राशि 'पूरी तरह अपर्याप्त' है।

संसदीय स्थायी समिति (अध्यक्ष: बसवराज बोम्मई) की सिफारिशें:

  1. तत्काल समीक्षा: ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन की तुरंत समीक्षा की जाए और इसमें सम्मानजनक वृद्धि की जाए।

  2. जीवन-यापन का आधार: पेंशन की राशि को वर्तमान जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) के अनुरूप तय किया जाना चाहिए।

  3. गिग वर्कर्स का पंजीकरण: समिति ने ई-श्रम पोर्टल पर एग्रीगेटर्स के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों के अनिवार्य पंजीकरण की भी बात कही है।

EPS-95 पेंशनभोगियों की स्थिति:

  • लाभार्थी: देश के लाखों निजी और संगठित क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारी इस योजना के दायरे में आते हैं।

  • वर्तमान राशि: न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह (जो कि प्रतिदिन के हिसाब से मात्र ₹33 बैठती है)।

  • मांग: पेंशनभोगी संगठन लंबे समय से इसे बढ़ाकर कम से कम ₹7,500 + डीए (DA) करने की मांग कर रहे हैं।

राजनीतिक संकेत:

जयराम रमेश ने उम्मीद जताई है कि अपनी ही पार्टी के सांसद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार अपनी "नींद" से जागेगी। यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों और संसद के सत्रों में और गरमा सकता है।


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