रायपुर (20 मार्च 2026): हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास के प्रथम दिन से शुरू होने वाले नव संवत्सर को मुख्यमंत्री ने 'नव संकल्प और नव चेतना' का प्रतीक बताया है।
1. छत्तीसगढ़ की पावन 'देवी विरासत' का उल्लेख
मुख्यमंत्री साय ने अपने संदेश में छत्तीसगढ़ की उन प्रमुख शक्तिपीठों और देवी स्वरूपों को याद किया, जो प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का आधार हैं:
प्रमुख शक्तिपीठ: माँ दंतेश्वरी (दंतेवाड़ा), माँ बम्लेश्वरी (डोंगरगढ़), माँ महामाया (रतनपुर), माँ चंद्रहासिनी (चंद्रपुर)।
आस्था के केंद्र: माँ शीतला, माँ कंकाली और माँ बिलईमाता जैसे स्वरूपों में रची-बसी प्रदेश की लोक-संस्कृति।
सांस्कृतिक महत्व: उन्होंने कहा कि इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति और साधना से आलोकित हो उठती है, जो सामाजिक समरसता का संचार करती है।
2. हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा: नई शुरुआत का उत्सव
गुड़ी पड़वा: मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले गुड़ी पड़वा को 'आशा और उत्साह' का प्रतीक बताया।
नव संवत्सर: उन्होंने हिंदू नववर्ष को सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत के संदेश के रूप में रेखांकित किया।
3. 'सुशासन' और विकास का संकल्प
मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक पर्व को शासन की प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा:
सांस्कृतिक संरक्षण: राज्य सरकार प्रदेश की समृद्ध विरासत को सहेजने के साथ-साथ विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रार्थना: उन्होंने माँ भगवती से प्रार्थना की कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और हर परिवार में सुख-शांति का वास हो।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
| विषय | मुख्यमंत्री का संदेश |
| अवसर | चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष, गुड़ी पड़वा 2026 |
| मुख्य मंत्र | नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना |
| विशेष उल्लेख | छत्तीसगढ़ की सात प्रमुख देवी परंपराएं |
| प्रतिबद्धता | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सुशासन |
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