गुवाहाटी/पलाशबाड़ी (3 अप्रैल 2026): असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पलाशबाड़ी निर्वाचन क्षेत्र में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में गडकरी ने भाजपा की समावेशी विचारधारा पर जोर देते हुए 'घुसपैठ' और 'नागरिकता' जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विवरण:

  • जाति-धर्म से ऊपर राजनीति: गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी विशिष्ट जाति, धर्म या भाषा के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा, "विविधता में एकता ही हमारी विशेषता और हमारा मूलमंत्र है।" यह बयान असम के भाषाई और धार्मिक रूप से संवेदनशील मतदाताओं को साधने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।

  • संशोधित नागरिकता अधिनियम (CAA) पर रुख: पड़ोसी देशों से उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के मुद्दे पर उन्होंने संविधान का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि सिख, हिंदू, बौद्ध और जैन जैसे समुदाय निर्वासित हैं और भारत के अलावा उनका कोई दूसरा घर नहीं है। उन्हें शरण देना भारत की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।

  • विदेशी नागरिकों के वोटिंग अधिकार पर प्रहार: विपक्ष पर निशाना साधते हुए गडकरी ने सवाल उठाया कि क्या विदेशी घुसपैठियों को मतदान का अधिकार दिया जाना चाहिए? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ, तो असम के मूल निवासियों के अधिकारों और पहचान पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

  • 10 साल का रिपोर्ट कार्ड: गडकरी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में डबल इंजन की सरकार ने असम के बुनियादी ढांचे, विशेषकर सड़कों और पुलों का जाल बिछाकर राज्य का कायाकल्प कर दिया है।

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