गुवाहाटी/जोरहाट। असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले महामुकाबले के लिए आज नामांकन का सबसे बड़ा दिन है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा आज गुवाहाटी में एक भव्य रोड शो के जरिए अपना पर्चा भरेंगे। उनके साथ ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कई कद्दावर नेता भी शुक्रवार को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी शंखनाद करेंगे।
जलुकबाड़ी में CM हिमंत का 'पावर शो'
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा अपनी पारंपरिक सीट जलुकबाड़ी से लगातार छठी बार जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में हैं। नामांकन से पहले वे एक विशाल जनसमूह के साथ पदयात्रा निकालेंगे:
रैली का रूट: खानापारा 'वेटेरिनरी फील्ड' से हेंगराबाड़ी स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय (DC Office) तक लगभग 5.6 किलोमीटर लंबी रैली।
जनता से अपील: CM ने 'एक्स' पर पोस्ट कर जनता का आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि लोगों का प्यार उन्हें असम की जिम्मेदारी पूरी करने की ऊर्जा देता है।
इतिहास: 2001 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे शर्मा ने पहली बार 1996 में यहाँ से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी, लेकिन उसके बाद से वे अजय रहे हैं।
विपक्ष के 'चाणक्य' भी भरेंगे हुंकार
सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन (UPA/महाजोत) के नेता भी आज अपनी ताकत दिखाएंगे:
देबब्रत सैकिया (कांग्रेस): विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नाजिरा सीट से नामांकन करेंगे। यह सीट उनके परिवार का गढ़ रही है, जहाँ से उनके पिता (पूर्व CM हितेश्वर सैकिया) और मां भी विधायक रह चुके हैं।
रिपुन बोरा (कांग्रेस): वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य बरचल्ला सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे।
अखिल गोगोई (रायजोर दल): शिवसागर सीट से अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
लुरिनज्योति गोगोई (AJP): खोवांग विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे।
चुनाव कार्यक्रम: महत्वपूर्ण तारीखें
असम में चुनावी प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है। निर्वाचन आयोग द्वारा तय शेड्यूल इस प्रकार है:
नामांकन की आखिरी तारीख: 23 मार्च 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 24 मार्च 2026
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 26 मार्च 2026
मतदान (Voting): 9 अप्रैल 2026
मतगणना (Results): 4 मई 2026
चुनावी माहौल
असम में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है। एक तरफ भाजपा 'विकास और डबल इंजन सरकार' के दम पर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस नीत गठबंधन (जिसमें रायजोर दल और AJP शामिल हैं) स्थानीय मुद्दों और 'सीएए' (CAA) विरोध के सहारे वापसी की उम्मीद कर रहा है।
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