नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक भारत में कुल पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या 50 लाख को पार कर गई है। सरकार ने इस गति को बनाए रखने के लिए 'FAME-III' सब्सिडी योजना के अगले चरण की घोषणा की है।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
सब्सिडी और प्रोत्साहन: FAME-III के तहत सरकार अब केवल दोपहिया वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-ट्रकों और इंटर-सिटी ई-बस संचालन के लिए भारी प्रोत्साहन दे रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: देश के हर 25 किलोमीटर पर एक फास्ट-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹15,000 करोड़ का बजट अलग रखा गया है। अब राजमार्गों पर 'ई-हाईवे' (E-Highways) विकसित किए जा रहे हैं जहाँ चलते हुए वाहन भी चार्ज हो सकेंगे।
लिथियम का स्वदेशी उत्पादन: जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ में मिले लिथियम भंडारों के व्यावसायिक खनन और रिफाइनिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे बैटरी की लागत में 30% की कमी आने की उम्मीद है, जिससे इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल कारों की कीमत के बराबर आ जाएंगी।
दिग्गज कंपनियों की धाक: टाटा मोटर्स और महिंद्रा के साथ-साथ अब मारुति सुजुकी और हुंडई ने भी अपने 'सस्ते' इलेक्ट्रिक मॉडल बाजार में उतार दिए हैं, जिससे मध्यम वर्ग की दिलचस्पी ई-वाहनों में बढ़ी है।
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