नयी दिल्ली। दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन हुई 26 वर्षीय तरुण खटीक की मौत ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भाजपा पर 'नफरत की राजनीति' का आरोप लगाने के बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन पर 'पक्षपाती आक्रोश' और 'दलित विरोधी' होने का आरोप लगाते हुए जोरदार हमला बोला है।
राहुल गांधी का हमला: "नफरत के तवे पर हिंसा की रोटी"
बृहस्पतिवार को राहुल गांधी ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा और उसके 'इकोसिस्टम' पर निशाना साधा। उनके बयान की मुख्य बातें:
हिंसा की कीमत: राहुल ने कहा कि उत्तम नगर के लोगों ने हिंसा की भारी कीमत चुकाई है—एक तरफ तरुण की जान गई और दूसरी तरफ पूरा परिवार उत्पीड़न झेल रहा है।
भाजपा पर आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नफरत के तवे पर हिंसा की रोटी सेंकने का कोई मौका नहीं छोड़ती और देश को हिंदू-मुस्लिम विवाद में उलझाकर रखना चाहती है।
रणनीतिक घेराबंदी: गांधी ने सवाल उठाया कि भाजपा दंगे जैसे हालात इसलिए पैदा कर रही है ताकि लोग प्रधानमंत्री से ऊर्जा और सामरिक संप्रभुता जैसे मुद्दों पर सवाल न पूछ सकें।
भाजपा का पलटवार: "वोटबैंक के लिए हत्यारों का बचाव"
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के आरोपों को 'पाखंड की पराकाष्ठा' करार दिया। भाजपा की दलीलें इस प्रकार हैं:
15 दिन की चुप्पी: भाजपा ने सवाल उठाया कि 4 मार्च को हुई घटना पर राहुल गांधी ने 15 दिन बाद क्यों बोला? आरोप लगाया गया कि यह देरी केवल राजनीतिक लाभ के लिए है।
पीड़ित और आरोपी की तुलना: पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी मृतक तरुण खटीक (एक दलित युवक) और आरोपियों के परिवारों को एक ही तराजू में तौल रहे हैं, जो कि पीड़ित का अपमान है।
दलित विरोधी मानसिकता: भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए दलितों का जीवन केवल तभी मायने रखता है जब वह उनकी राजनीति के अनुकूल हो।
क्या थी उत्तम नगर की घटना?
तारीख: 4 मार्च (होली का दिन)।
विवाद: दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश।
नतीजा: भारी पथराव और लाठी-डंडों से हमले में 26 वर्षीय तरुण खटीक की मौत हो गई।
पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषण
दिल्ली में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, उत्तम नगर की यह घटना अब कानून-व्यवस्था के बजाय 'सांप्रदायिक और जातीय' ध्रुवीकरण का मुद्दा बनती दिख रही है। जहाँ राहुल गांधी इसे 'भारत जोड़ो' के संदेश से जोड़ रहे हैं, वहीं भाजपा इसे 'तुष्टीकरण' और 'हिंदू विरोध' के तौर पर पेश कर रही है।
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