अहमदाबाद/ऊना: गुजरात के ऊना में लगभग एक दशक पहले हुए बहुचर्चित दलित उत्पीड़न मामले में न्याय की घड़ी आ गई है। राज्य की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को इस मामले के पांच मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और मुख्य बिंदु:
2016 की घटना: यह मामला जुलाई 2016 का है, जब ऊना के मोटा समधियाला गाँव में कथित 'गौ रक्षकों' के एक समूह ने एक मृत गाय की खाल उतारने के आरोप में दलित परिवार के सदस्यों की बेरहमी से पिटाई की थी।
सोशल मीडिया पर वायरल: पीड़ितों को सरेआम कार से बांधकर घसीटा गया और उन पर कोड़े बरसाए गए थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश भर में भारी आक्रोश फैला था और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
अदालती कार्यवाही: विशेष अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर माना कि आरोपियों ने अमानवीय कृत्य किया, जिससे समाज की समरसता और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ।
सजा और जुर्माना:
विशेष न्यायाधीश ने सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे कृत्यों के लिए कानून में कोई स्थान नहीं है।
कारावास: पांचों दोषियों को पांच साल की जेल काटनी होगी।
आर्थिक दंड: प्रत्येक पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे न भरने पर सजा की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव:
ऊना की इस घटना ने तत्कालीन गुजरात सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती पैदा की थी और इसके बाद राज्य में दलित आंदोलन ने एक नई करवट ली थी। इस फैसले को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने 'देर से मिला, लेकिन महत्वपूर्ण न्याय' करार दिया है।
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