मुंबई (4 अप्रैल 2026): संगीत जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते हस्तक्षेप के बीच IPRS ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म यदि एआई का उपयोग करके किसी कलाकार की 'वॉइस क्लोनिंग' या 'मेलोडी' बनाता है, तो उसे मूल कलाकार को रॉयल्टी (Royalty) देना अनिवार्य होगा।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • कलाकारों का अधिकार: संगीत निर्देशक ए.आर. रहमान ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह "रचनात्मकता की आत्मा को बचाने" जैसा है।

  • रेवेन्यू शेयरिंग: यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब एआई-जनरेटेड गानों से होने वाली कमाई का एक निश्चित हिस्सा आई पी आर एस के पास जमा करना होगा।

  • वॉटरमार्क अनिवार्य: एआई से बने हर संगीत ट्रैक पर डिजिटल वॉटरमार्क होना अनिवार्य है ताकि पता चल सके कि यह मानव-निर्मित नहीं है।

  • कानूनी कार्रवाई: बिना अनुमति के किसी की आवाज का एआई क्लोन बनाने पर कॉपीराइट उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाएगा।

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