कन्नूर (केरल): केरल की सत्ताधारी पार्टी माकपा (CPI-M) ने मंगलवार को एक कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए अपने वरिष्ठ नेता टी. के. गोविंदन को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब गोविंदन ने पार्टी के आधिकारिक फैसले को चुनौती देते हुए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की।
विवाद की मुख्य वजह: 'परिवारवाद' बनाम 'संगठन'
उम्मीदवारी पर टकराव: विवाद की जड़ तालिपारम्बा निर्वाचन क्षेत्र है। माकपा ने यहाँ से राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन की पत्नी पी. के. श्यामला को उम्मीदवार बनाया है। टी. के. गोविंदन ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और इसे 'अपनों को रेवड़ी बांटने' जैसा करार दिया।
बागी तेवर: पार्टी के फैसले से नाराज होकर गोविंदन ने संगठन से नाता तोड़ने और तालिपारम्बा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बनाया है।
पार्टी नेतृत्व का कड़ा प्रहार:
माकपा के कन्नूर जिला सचिव के. के. रागेश ने संवाददाता सम्मेलन में गोविंदन पर 'राजनीतिक विश्वासघात' का आरोप लगाया:
पार्टी विरोधी गतिविधियां: रागेश ने कहा कि गोविंदन अब कम्युनिस्ट कहलाने के हकदार नहीं हैं और वे विपक्षी यूडीएफ (UDF) के इशारे पर काम कर रहे हैं।
योग्यता का बचाव: पार्टी ने स्पष्ट किया कि पी. के. श्यामला का चयन उनके व्यापक संगठनात्मक अनुभव के आधार पर एक 'सामूहिक निर्णय' था, न कि किसी रिश्तेदारी के कारण।
आरोपों का खंडन: वरिष्ठ नेता एम. वी. जयराजन ने भी हालिया "हैप्पीनेस फेस्ट" को लेकर गोविंदन द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को आधारहीन बताया।
राजनीतिक प्रभाव:
कन्नूर को माकपा का सबसे मजबूत किला माना जाता है। यहाँ किसी वरिष्ठ नेता का बागी होना न केवल चुनावी समीकरण बिगाड़ सकता है, बल्कि पार्टी के कैडर बेस में भी असंतोष पैदा कर सकता है।
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