कोच्चि (19 मार्च 2026): केरल हाई कोर्ट ने कोझिकोड के एक निजी अस्पताल को निर्देश दिया है कि वह वेंटिलेटर पर मौजूद 'ब्रेन डेड' व्यक्ति के प्रजनन अंश (Gametes) निकालकर उन्हें एक मान्यता प्राप्त ART क्लिनिक में संरक्षित करे।
1. याचिकाकर्ता की व्यथा और कानूनी अड़चन
मामले की पृष्ठभूमि: महिला के पति को चिकन पॉक्स (Cheiken Pox) के बाद गंभीर दिमागी समस्या (Cerebral Venous Thrombosis) हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया।
सहमति की समस्या: ART एक्ट की धारा 22 के तहत किसी भी प्रजनन प्रक्रिया के लिए पति-पत्नी दोनों की 'लिखित सहमति' अनिवार्य होती है। चूंकि पति वेंटिलेटर पर और अचेत अवस्था में हैं, वे कानूनी रूप से सहमति देने में सक्षम नहीं हैं।
अपील: महिला ने कोर्ट से गुहार लगाई कि देरी होने पर उसके भविष्य में माँ बनने की संभावना हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
2. कोर्ट का अंतरिम आदेश और शर्तें
जस्टिस की खंडपीठ ने मामले की तात्कालिकता को समझते हुए राहत तो दी, लेकिन कुछ कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं:
केवल संरक्षण: कोर्ट ने अभी केवल स्पर्म निकालने और उन्हें 'सुरक्षित' (Preserve) रखने की अनुमति दी है।
भविष्य की प्रक्रिया: यदि महिला भविष्य में IVF (In-Vitro Fertilization) या अन्य किसी तकनीक का उपयोग करना चाहती है, तो उसे दोबारा न्यायालय से अनुमति लेनी होगी।
अगली सुनवाई: मामले के विस्तृत कानूनी पहलुओं (सहमति की अनुपस्थिति में प्रक्रिया की वैधता) पर विचार करने के लिए अगली तारीख 7 अप्रैल 2026 तय की गई है।
3. कानूनी महत्व (Legal Significance)
भारत में 'ब्रेन डेड' व्यक्ति की प्रजनन कोशिकाओं के उपयोग को लेकर कानून अभी भी विकसित हो रहा है। केरल हाई कोर्ट का यह फैसला उन परिस्थितियों के लिए एक मिसाल बनेगा जहाँ जीवन और मृत्यु के बीच की धुंधली रेखा में 'प्रजनन अधिकारों' (Reproductive Rights) की बात आती है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
| विवरण | जानकारी |
| कोर्ट | केरल हाई कोर्ट (कोच्चि) |
| मुख्य मुद्दा | ब्रेन डेड व्यक्ति की सहमति के बिना स्पर्म प्रिजर्वेशन |
| लागू कानून | असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट |
| अगली सुनवाई | 7 अप्रैल 2026 |
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