बस्तर की आवाज: फूलोदेवी नेताम (कांग्रेस)
फूलोदेवी नेताम छत्तीसगढ़ कांग्रेस का एक ऐसा चेहरा हैं जिन्होंने बस्तर के आदिवासी अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
दोबारा निर्वाचन: साल 2020 में पहली बार राज्यसभा पहुँचने वाली फूलोदेवी को कांग्रेस ने उनकी सक्रियता को देखते हुए दूसरी बार उच्च सदन भेजा है।
नक्सली हमले में बाल-बाल बचीं: वे साल 2013 के कुख्यात झरम घाटी हमले के दौरान कांग्रेस नेताओं के उस काफिले में शामिल थीं, जिस पर नक्सलियों ने हमला किया था। वे इस हमले में सुरक्षित बच गई थीं।
संगठनात्मक अनुभव: वे छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की सदस्य रह चुकी हैं।
आदिवासी नेतृत्व: बस्तर क्षेत्र की एक सशक्त आदिवासी नेता के रूप में वे संसद में जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही हैं।
जमीनी संघर्ष की मिसाल: लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)
भाजपा की ओर से राज्यसभा पहुँचने वाली लक्ष्मी वर्मा एक ऐसी नेत्री हैं जिन्होंने पार्षद से लेकर सांसद तक का सफर अपनी मेहनत और सांगठनिक कौशल से तय किया है।
शुरुआत (1990): लक्ष्मी वर्मा ने साल 1990 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ली। उन्हें पूर्व राज्यपाल रमेश बैस का सांसद प्रतिनिधि बनने पर गहरा प्रशासनिक अनुभव मिला।
पार्षद से जिला पंचायत अध्यक्ष: वे 1994 में पार्षद चुनी गईं और बाद में 2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं।
संगठन में पकड़: वे भाजपा छत्तीसगढ़ की प्रदेश उपाध्यक्ष और गरियाबंद जिले की संगठन प्रभारी रह चुकी हैं।
ओबीसी चेहरा: बलौदाबाजार की मूल निवासी लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजकर भाजपा ने महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ ओबीसी वर्ग को भी एक बड़ा संदेश दिया है।
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