रायपुर (19 मार्च 2026): प्रदेश में जबरन और प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए साय सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। इस कानून में 'डिजिटल धर्मांतरण' और 'सामूहिक धर्मांतरण' जैसी नई चुनौतियों को भी शामिल किया गया है।
1. धर्मांतरण की प्रक्रिया और 'घर वापसी' पर स्पष्टता
स्वेच्छा से धर्मांतरण: यदि कोई अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट (DM) को पूर्व सूचना देनी होगी। इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और 30 दिनों तक आपत्तियों का इंतजार किया जाएगा।
घर वापसी: विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म (पूर्वजों के धर्म) में वापस लौटता है, तो उसे 'धर्मांतरण' की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा और उस पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं होगी।
2. डिजिटल और सोशल मीडिया पर नजर
नए कानून में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए दिए जाने वाले प्रलोभन या भ्रामक जानकारी को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऑनलाइन गेमिंग या चैटिंग ऐप्स के माध्यम से होने वाले ब्रेनवॉशिंग पर अब कड़ी कार्रवाई होगी।
3. सजा और भारी जुर्माने के प्रावधान
विधेयक में अपराध की गंभीरता के आधार पर सख्त सजा तय की गई है:
| अपराध की श्रेणी | जेल की सजा | न्यूनतम जुर्माना |
| सामान्य अवैध धर्मांतरण | 7 से 10 वर्ष | ₹5 लाख |
| नाबालिग/महिला/SC/ST/OBC का धर्मांतरण | 10 से 20 वर्ष | ₹10 लाख |
| सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) | 10 वर्ष से आजीवन कारावास | ₹25 लाख |
4. कानूनी शक्ति और न्यायालय
गैर-जमानती: इस कानून के तहत दर्ज सभी मामले संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) होंगे।
विशेष न्यायालय: मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों (Special Courts) का गठन किया जाएगा।
राजनीतिक बहस और विपक्ष का रुख
गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में कहा कि "यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि छल-कपट से होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ है।" वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इसे 'असंवैधानिक' और 'धार्मिक स्वतंत्रता का हनन' बताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।
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