रायपुर, छत्तीसगढ़। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में चल रहे बड़े राशन कार्ड घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें खाद्य विभाग की जांच से पता चला है कि कई परिवारों में मां और उसकी नाबालिग बेटी के नाम पर अलग-अलग राशनकार्ड बनाए गए हैं। खास बात यह है कि 18 वर्ष से कम उम्र के 1,800 से अधिक नाबालिगों के नाम पर भी अलग से राशनकार्ड जारी किए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार नाबालिगों के लिए व्यक्तिगत राशन कार्ड बनाना मंज़ूर नहीं है।

जांच में यह भी उजागर हुआ है कि इस घोटाले में डुप्लीकेट आधार कार्ड का इस्तेमाल कर खाद्य विभाग की फ्री राशन योजना का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह फर्जीवाड़ा गरीब और जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 110 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों के नाम पर भी राशनकार्ड बनाए गए हैं, जो इस धोखाधड़ी की गंभीरता को दर्शाता है। यह मामला न केवल खाद्य सामग्री की गड़बड़ी है बल्कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है।

खाद्य विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। विभाग ने पुनः जांच टीम गठित की है जो इस घोटाले की गहराई में जाकर सभी कागजात, आधार कार्ड व राशनकार्ड के डुप्लीकेट संस्करणों की छानबीन कर रही है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के सरकारी वितरण तंत्र की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर भी प्रभाव डाल रहा है। प्रशासन ने ऐसे घोटालों को रोकने के लिए तकनीकी सुधारों और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है ताकि भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके।

सरकार और विभाग की ओर से जनता से अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार के खाद्य वितरण में गड़बड़ी की सूचना संबंधित अधिकारियों को तत्काल दें ताकि भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सके और गरीबों को उनकी उचित सुविधा मिल सके।


इस तरह छत्तीसगढ़ में राशन कार्ड और आधार कार्ड के दुरुपयोग से जुड़े इस घोटाले ने सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर ठेस पहुंचाई है और इसे सुधारने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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