छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में हुए पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में विशेष अदालत में 2000 पन्नों का पूरक आरोपपत्र पेश किया है। इसमें आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी को मुख्य आरोपी बताया गया है। चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मामले की प्रमुख बातें:
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मुख्य आरोपी: तमन सिंह सोनवानी, जो CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष थे।
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परिवारिक लाभ: सोनवानी के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), सहायक वन संरक्षक (ACF) जैसे पदों पर चयनित किया गया।
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पेपर लीक: फरवरी 2022 में होने वाली प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गए थे।
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जांच में शामिल अन्य व्यक्ति: परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और एकेडी प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के अरुण द्विवेदी, जिनकी फर्म को परीक्षा सामग्री संभालने का जिम्मा था।
सीबीआई की कार्रवाई:
सीबीआई ने इस मामले में तमन सिंह सोनवानी, उनके परिवार के सदस्यों, और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारी इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है।
समाज पर प्रभाव:
इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं में निराशा और आक्रोश व्याप्त है। उम्मीदवारों का मानना है कि इस तरह के घोटाले उनके भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।
इस मामले में न्याय की उम्मीद सभी प्रभावितों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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