बस्तर दशहरे के अवसर पर मंगलवार को मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र जगदलपुर के लिए रवाना होंगे। यह परंपरा हर साल बस्तर दशहरे के मौके पर आयोजित होती है, जिसमें मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र को दंतेवाड़ा मंदिर से जगदलपुर भेजा जाता है। इस यात्रा को 'पावली परघाव' कहा जाता है, जो बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पावली परघाव के दिन, मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ दंतेवाड़ा मंदिर से जगदलपुर के लिए रवाना किया जाता है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालु पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ डोली और छत्र की पूजा अर्चना करते हैं। यह आयोजन बस्तर क्षेत्र के लोगों के लिए धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
इस वर्ष भी पावली परघाव के दिन, मां दंतेश्वरी की डोली और छत्र की यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें।
पावली परघाव के इस आयोजन से बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और धार्मिक आस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। यह आयोजन बस्तर दशहरे की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो क्षेत्रीय एकता और भाईचारे को प्रगाढ़ करता है।
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