अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने धर्मनगर सीट पर जीत के प्रति 'शत-प्रतिशत' आश्वस्त होने की बात कही है। यह सीट विधानसभा अध्यक्ष विस्वबंधु सेन के दुखद निधन के बाद खाली हुई थी। भाजपा ने यहाँ से जहार चक्रवर्ती पर दांव लगाया है, जिन्हें विस्वबंधु सेन की विरासत को आगे बढ़ाने वाले चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री के 'एकतरफा मुकाबले' के पीछे के 3 तर्क:
विपक्ष का बिखराव: सीएम साहा ने रेखांकित किया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम मोर्चे (Left Front) के बीच जो 'तालमेल' था, वह इस उपचुनाव में गायब है। वाम मोर्चे ने अमिताभ दत्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस के साथ कोई आधिकारिक गठबंधन नजर नहीं आ रहा है।
वोटों का विभाजन: विपक्ष के अलग-अलग चुनाव लड़ने से भाजपा विरोधी वोट बंटने की पूरी संभावना है, जिसका सीधा फायदा भाजपा उम्मीदवार जहार चक्रवर्ती को मिलेगा।
विस्वबंधु सेन की विरासत: यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। पूर्व अध्यक्ष विस्वबंधु सेन की लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए कार्यों के प्रति सहानुभूति भी भाजपा के पक्ष में माहौल बना रही है।
धर्मनगर उपचुनाव: मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| सीट रिक्त होने का कारण | विस्वबंधु सेन (पूर्व अध्यक्ष) का निधन |
| भाजपा उम्मीदवार | जहार चक्रवर्ती |
| वाम मोर्चा उम्मीदवार | अमिताभ दत्ता |
| मतदान की तिथि | 9 अप्रैल, 2026 |
| नतीजे | 4 मई, 2026 |
रणनीतिक मायने:
अगर भाजपा यह सीट भारी अंतर से जीतती है, तो यह मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व पर जनता की मुहर होगी। वहीं, विपक्ष (वाम और कांग्रेस) के लिए यह आत्ममंथन का विषय होगा कि क्या अलग-अलग लड़कर वे भाजपा को चुनौती दे पाएंगे।
निष्कर्ष:
मुख्यमंत्री का यह बयान विपक्षी खेमे में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकता है। धर्मनगर की जनता विकास के निरंतरता पर मुहर लगाती है या बदलाव का रास्ता चुनती है, इसका फैसला 9 अप्रैल को ईवीएम में कैद हो जाएगा।
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