कोलंबो/इस्लामाबाद (20 मार्च 2026): दक्षिण एशिया के इन दो देशों में ईंधन की कीमतें आम आदमी की पहुँच से बाहर होती जा रही हैं। श्रीलंका की 'सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन' और 'लंका आईओसी' ने आज से ही नई दरें लागू कर दी हैं।
1. श्रीलंका: पेट्रोल ₹25 और डीजल ₹24 महंगा
श्रीलंका में पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कीमतों में भारी इजाफा किया है, जिसके बाद ईंधन के नए दाम इस प्रकार हैं:
पेट्रोल (95 ऑक्टेन): ₹25 की वृद्धि के साथ अब ₹365 प्रति लीटर।
पेट्रोल (92 ऑक्टेन): ₹24 की वृद्धि के साथ ₹317 प्रति लीटर।
सुपर डीजल: ₹24 बढ़कर ₹353 प्रति लीटर।
केरोसिन (मिट्टी तेल): ₹13 की बढ़ोतरी के साथ ₹195 प्रति लीटर।
2. पाकिस्तान: ₹335 के पार पहुँचा डीजल
पाकिस्तान में हालात और भी खराब हैं, जहाँ सरकार ने दो दिन पहले ही कीमतों में एकमुश्त ₹55 की बढ़ोतरी की थी:
पेट्रोल: अब ₹321.17 प्रति लीटर की दर से मिल रहा है।
डीजल: इसकी कीमत ₹335.86 प्रति लीटर तक पहुँच गई है।
नोट: पाकिस्तान में मार्च महीने में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे वहां परिवहन और खाद्य सामग्री की कीमतें आसमान छू रही हैं।
3. कच्चे तेल का वैश्विक गणित (Global Crude Impact)
कोलंबो विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर प्रियंगा दुनुसिंघे के अनुसार, वैश्विक रुझान बेहद चिंताजनक हैं:
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): पिछ्ले शुक्रवार को जो कच्चा तेल $92-$93 प्रति बैरल था, वह सोमवार को बाजार खुलते ही $115 प्रति बैरल तक पहुँच गया।
सप्लाई चैन: खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
ईंधन का नया रेट कार्ड (श्रीलंका - मार्च 2026)
| ईंधन का प्रकार | पुरानी कीमत | नई कीमत | कुल वृद्धि |
| पेट्रोल 95 ऑक्टेन | ₹340 | ₹365 | + ₹25 |
| पेट्रोल 92 ऑक्टेन | ₹293 | ₹317 | + ₹24 |
| सुपर डीजल | ₹329 | ₹353 | + ₹24 |
| ऑटो डीजल | ₹281 | ₹303 | + ₹22 |
| केरोसिन | ₹182 | ₹195 | + ₹13 |
निष्कर्ष: भारत पर क्या होगा असर?
श्रीलंका और पाकिस्तान में कीमतों में इस भारी उछाल का मुख्य कारण उनकी मुद्रा का कमजोर होना और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी है। भारत के संदर्भ में, हालांकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन सरकार ने फिलहाल घरेलू कीमतों में ऐसी किसी बड़ी बढ़ोतरी का संकेत नहीं दिया है। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में $115 प्रति बैरल का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है।
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