कोलकाता: टीएमसी के कद्दावर प्रवक्ताओं—कुणाल घोष और मंत्री ब्रात्य बसु—ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सबसे बड़े चेहरों में से एक, शुभेंदु अधिकारी, अपनी परंपरागत सीट पर भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
टीएमसी के हमले के 3 मुख्य बिंदु:
आत्मविश्वास की कमी: कुणाल घोष ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी पहले किसी भी सीट से जीतने का दंभ भरते थे, लेकिन अब भबानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगह से लड़ने की योजना उनकी कमजोरी को दर्शाती है। टीएमसी के अनुसार, उन्हें "दीवार पर लिखी इबारत" (आसन्न हार) साफ दिख रही है।
ममता बनर्जी का 'भबानीपुर' गढ़: मंत्री ब्रात्य बसु ने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भबानीपुर से ही ताल ठोकेंगी। उन्होंने दावा किया कि दीदी 50,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज करेंगी, जबकि शुभेंदु को नंदीग्राम में भी हार का स्वाद चखना होगा।
दिलीप घोष पर कटाक्ष: खड़गपुर पश्चिम से दिलीप घोष को उम्मीदवार बनाए जाने पर टीएमसी ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में हाशिए पर धकेल दिया गया था। दीघा में ममता बनर्जी द्वारा उनके स्वागत का जिक्र कर टीएमसी ने भाजपा के भीतर की गुटबाजी पर निशाना साधा।
विपक्ष (वाम-कांग्रेस) पर रुख:
कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि टीएमसी की नजर में माकपा (CPM) और कांग्रेस की कोई चुनावी अहमियत नहीं बची है। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी को चौथी बार सत्ता की कमान सौंपने के लिए तैयार है।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: एक नज़र में
| निर्वाचन क्षेत्र | संभावित मुकाबला | टीएमसी का दावा |
| भबानीपुर | ममता बनर्जी vs (भाजपा उम्मीदवार) | 50,000+ मतों से जीत |
| नंदीग्राम | शुभेंदु अधिकारी vs टीएमसी उम्मीदवार | भाजपा की करारी हार |
| खड़गपुर पश्चिम | दिलीप घोष vs टीएमसी उम्मीदवार | भाजपा में आंतरिक कलह |
निष्कर्ष:
शुभेंदु अधिकारी को दो सीटों पर घेरकर टीएमसी एक मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है। नंदीग्राम और भबानीपुर की लड़ाई 2021 की तरह ही 2026 में भी राज्य का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला होने जा रही है।
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