बीजिंग/नयी दिल्ली। चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में विक्रम दुरईस्वामी की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक गहरे कूटनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ही उनके चीनी नाम ‘वेई जियामेंग’ (Wei Jiameng) ने बीजिंग के गलियारों में काफी चर्चा छेड़ दी है। चीनी विदेश मंत्रालय से लेकर वहां के थिंक-टैंक तक, दुरईस्वामी की 'चीन विशेषज्ञता' को द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक शुभ संकेत मान रहे हैं।
क्या है 'वेई जियामेंग' का कूटनीतिक अर्थ?
चीनी भाषा (मंदारिन) के विद्वानों के अनुसार, दुरईस्वामी द्वारा चुना गया नाम उनके व्यक्तित्व और मिशन को दर्शाता है:
वेई (Wei): यह एक प्रसिद्ध चीनी उपनाम है, जिसका उच्चारण विक्रम के 'वी' से मिलता है। प्राचीन चीनी इतिहास में 'वेई' एक अत्यंत शक्तिशाली राज्य का नाम भी था।
जिया (Jia): इसका अर्थ है 'शुभ' या 'प्रशंसनीय'।
मेंग (Meng): इसका अर्थ होता है 'सहयोगी' या 'गठबंधन'।
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे नाम का अर्थ निकलता है— "एक उत्कृष्ट और शुभ गठबंधन बनाने वाला।" वर्तमान सीमा विवाद के संदर्भ में इस नाम को संबंधों में सुधार की इच्छा के रूप में देखा जा रहा है।
मंदारिन के जानकार और पुराने 'बीजिंग हैंड'
विक्रम दुरईस्वामी (IFS 1992 बैच) चीन के लिए कोई नए चेहरे नहीं हैं:
भाषाई पकड़: वे मंदारिन भाषा के गहरे जानकार हैं। उन्होंने हांगकांग के येल-इन-एशिया भाषा स्कूल से चीनी भाषा में डिप्लोमा प्राप्त किया है।
अनुभव: उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में हांगकांग और बीजिंग (1996 से चार साल) के भारतीय मिशनों में अपनी सेवा दी है। फिलहाल वे ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में तैनात हैं।
चीनी मीडिया और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने उनकी नियुक्ति को पहले पन्ने पर जगह देते हुए उन्हें एक 'अनुभवी चीन विशेषज्ञ' बताया है।
लिन मिनवांग (फुदान यूनिवर्सिटी): "चीन में राजदूत का पद भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। दुरईस्वामी के पुराने अनुभव ने उन्हें चीन की गहरी और तर्कसंगत समझ दी है।"
कियान फेंग (त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी): "यह नियुक्ति दर्शाती है कि नई दिल्ली बीजिंग के साथ संबंधों को कितना महत्व दे रही है। यह व्यावसायिकता और व्यावहारिकता का एक सकारात्मक संकेत है।"
रणनीतिक महत्व
बीजिंग में एक ऐसे राजदूत की उपस्थिति जो वहां की भाषा, संस्कृति और कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझता हो, दोनों देशों के बीच जमी हुई बर्फ को पिघलाने में सहायक हो सकती है। चीन इसे भारत की ओर से संबंधों को स्थिर करने के एक गंभीर प्रयास के रूप में देख रहा है।
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