महासमुंद। शासन की मंशानुरूप जिले के छात्रावासों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अब घर जैसा सुरक्षित और स्नेहमयी वातावरण मिल रहा है। इसी कड़ी में प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, महासमुंद में बच्चों का उत्साहवर्धन करने के लिए एक विशेष सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
शासन की योजनाओं से संवर रहा भविष्य
राज्य शासन के प्रावधानों के तहत छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ उनकी दैनिक आवश्यकताओं की सभी वस्तुएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी व्यवस्था के अंतर्गत छात्रावास अधीक्षक नीलेश खांडे द्वारा छात्र-छात्राओं को लोअर, टी-शर्ट, जूते, मोजे, स्वेटर और स्कूल बैग सहित दैनिक उपयोग की अन्य जरूरी सामग्रियां वितरित की गईं। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ देखी गई।
दूरस्थ अंचलों के बच्चों को मिल रहा संबल
उल्लेखनीय है कि वनांचल और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के होनहार छात्र बेहतर शिक्षा की उम्मीद में जिला व विकासखंड मुख्यालयों के छात्रावासों में प्रवेश लेते हैं। इन बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शासन द्वारा कई प्रोत्साहनात्मक योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्री-मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास इस दिशा में लगातार अनुकरणीय प्रयास कर रहा है।
पढ़ाई के साथ मनोरंजन और विशेष कक्षाएं
इस छात्रावास की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का पारिवारिक माहौल है। बच्चों को मानसिक रूप से तनावमुक्त रखने और उनके समग्र विकास के लिए कई अनूठी पहल की जा रही हैं:
  • विशेष डाउट क्लासेस: विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं को दूर करने के लिए यहाँ प्रतिदिन विशेष अध्ययन सत्र और शंका समाधान (डाउट) क्लास लगाई जाती है।
  • शिक्षाप्रद फ़िल्में: हर शनिवार और रविवार को बच्चों के मनोरंजन और प्रेरणा के लिए ज्ञानवर्धक व शिक्षाप्रद फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता है।
  • आदर्श परिसर: हरा-भरा और स्वच्छ परिसर, कड़ा अनुशासन तथा बच्चों की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखने वाली व्यवस्था के कारण यह छात्रावास अब बच्चों के लिए 'दूसरा घर' बन चुका है।
इन्हीं बेहतर सुविधाओं और सकारात्मक वातावरण के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे यहाँ रहकर पूरी रुचि और एकाग्रता के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।