नयी दिल्ली (17 मार्च 2026): मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों के निलंबन को समाप्त करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। ये सांसद 3 फरवरी से सदन की कार्यवाही से बाहर थे और संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।
निलंबन वापसी की प्रक्रिया: कैसे बनी सहमति?
अध्यक्ष की पहल: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की थी, जिसमें सदन की गरिमा और सुचारू संचालन के लिए निलंबन वापस लेने पर आम सहमति बनी।
खेद प्रकटीकरण: कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने विपक्षी सदस्यों के पिछले आचरण पर सदन में खेद जताया और निलंबन रद्द करने का औपचारिक अनुरोध किया।
प्रस्ताव और मंजूरी: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत (Voice Vote) से तुरंत मंजूरी दे दी।
निलंबन रद्द किए गए सांसदों की सूची:
| सांसद का नाम | पार्टी | निर्वाचन क्षेत्र |
| मणिकम टैगोर | कांग्रेस | विरुधुनगर (तमिलनाडु) |
| अमरिंदर सिंह राजा वडिंग | कांग्रेस | लुधियाना (पंजाब) |
| गुरजीत सिंह औजला | कांग्रेस | अमृतसर (पंजाब) |
| हिबी ईडन | कांग्रेस | एर्नाकुलम (केरल) |
| डीन कुरियाकोस | कांग्रेस | इडुक्की (केरल) |
| प्रशांत पडोले | कांग्रेस | भंडारा-गोंदिया (महाराष्ट्र) |
| किरण कुमार रेड्डी | कांग्रेस | राजमपेट (आंध्र प्रदेश) |
| एस. वेंकटेशन | माकपा (CPIM) | मदुरै (तमिलनाडु) |
निष्कर्ष:
इन सांसदों को बजट सत्र के पहले चरण में "आसन की ओर कागज फेंकने" और सदन की अवमानना के कारण पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया था। निलंबन वापसी से अब बजट सत्र के दूसरे चरण में विपक्ष की उपस्थिति मजबूत होगी, जिससे जनहित के मुद्दों पर अधिक व्यापक चर्चा की उम्मीद की जा सकती है।
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