नयी दिल्ली: चर्चा की शुरुआत बनासकांठा (गुजरात) से कांग्रेस सांसद गनिबेन ठाकोर ने की, जिन्होंने सीधे तौर पर भाजपा की 'गौ-भक्ति' पर सवाल उठाए।
प्रमुख सांसदों के तर्क और मांगें:
गनिबेन ठाकोर (कांग्रेस): * दावा किया कि गुजरात की 1,800 से अधिक गौशालाओं को सरकार से कोई सहायता नहीं मिल रही है।
मांग की कि हर गाय की देखभाल के लिए सरकार ₹100 प्रतिदिन दे।
गुजरात में मूंगफली खरीद में करोड़ों के घोटाले का आरोप लगाया।
हरसिमरत कौर बादल (SAD): * आंकड़ों के जरिए घेरा: 2019 में कृषि का हिस्सा 5.5% था, जो 2026 में घटकर आधा रह गया है।
पंजाब की 2025 की बाढ़ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ₹12,500 करोड़ का फंड होने के बावजूद पीड़ितों को मदद नहीं मिली।
संजना जाटव और रवींद्र चौहान (कांग्रेस):
MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग।
पीएम किसान सम्मान निधि को ₹6,000 से बढ़ाकर ₹12,000 करने की पुरजोर मांग की।
महाराष्ट्र (मराठवाड़ा) में फसल बीमा को 'बड़ा घोटाला' बताया।
हनुमान बेनीवाल (RLP) और चंद्रशेखर (ASP):
दोनों ने किसान सम्मान निधि बढ़ाने का समर्थन किया और अपने क्षेत्रों में फसल बीमा के क्रियान्वयन की जांच की मांग की।
क्षेत्रीय विशिष्ट मुद्दे:
पप्पू यादव (निर्दलीय): कोसी-मेची लिंक परियोजना को 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित करने की मांग की।
मोहम्मद हनीफा (निर्दलीय): लद्दाख में जलवायु परिवर्तन और सूखे के कारण सेब की बागवानी को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया और फसल बीमा लागू करने की मांग की।
उमेशभाई पटेल (निर्दलीय): इजराइल-ईरान युद्ध के कारण मछुआरों को डीजल की आपूर्ति बंद होने का मुद्दा उठाया।
आम चिंताएँ:
बजट आवंटन: विपक्षी दलों (विशेषकर सपा के हरेंद्र सिंह मलिक) ने चिंता जताई कि केंद्रीय बजट का केवल 2.7% कृषि को दिया गया है।
गुणवत्ता: नकली उर्वरक और बीज की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गई।
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