मुंबई (3 अप्रैल 2026): वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। शुक्रवार को कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) में 850 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 भी 19,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
कच्चे तेल का दबाव: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $95 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में उछाल से 'राजकोषीय घाटा' बढ़ने का डर बाजार पर हावी है।
सेक्टरवार प्रदर्शन: बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों के गिरने से बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया। हालांकि, रक्षा (Defense) और सोना (Gold) से जुड़े शेयरों में हल्की बढ़त देखी गई।
रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर बढ़ रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने से घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों की राय: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति शांत नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को इस समय 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनानी चाहिए।
Powered by Froala Editor




