धर्मकोट (मोगा): दाना मंडी में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पंजाब अब 'पर्दे के पीछे की राजनीति' के दौर से बाहर निकल चुका है।
संबोधन के 5 बड़े बिंदु:
विपक्ष की 'किराए की भीड़' बनाम 'जनसमर्थन': मान ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपनी रैलियों में पैसा खर्च करके और लोगों को किराए पर बुलाकर भीड़ जुटाते हैं, जबकि 'आप' की रैलियों में लोग स्वेच्छा और गर्व से शामिल होते हैं।
कुशासन का आरोप: मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने दशकों तक पंजाब को लूटा और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने तीखी टिप्पणी की— "वे नेता अब कानून-व्यवस्था की बात कर रहे हैं, जिनके हाथ राज्य के युवाओं के खून से सने हैं।"
4 साल के वादे पूरे: मान ने दावा किया कि उनकी सरकार ने जनता से किए गए अधिकांश वादे महज चार साल में पूरे कर दिए हैं। अब कार्यकाल का शेष एक वर्ष पंजाब को दशकों की उपेक्षा से बाहर निकालने में लगाया जाएगा।
विश्वसनीयता का संकट: उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे केवल उनकी (मान की) आलोचना करने के लिए एक साथ आए हैं। जनता अब इनके 'झूठे बयानों' से गुमराह होने वाली नहीं है।
शिक्षा पर जोर: जनसभा से पहले मुख्यमंत्री ने बाजेके गांव में एक प्रतिष्ठित विद्यालय (School) की आधारशिला रखी और कहा कि शिक्षा और रोजगार ही गरीबी उन्मूलन का एकमात्र रास्ता है।
2027 का चुनावी शंखनाद:
भगवंत मान ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं की विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2027 के चुनावों में पंजाब की जनता इन 'पाप करने वाले' दलों को कभी माफ नहीं करेगी और उन्हें करारी शिकस्त देगी।
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