नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): भारत ने दूरसंचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने 'भारत 6G' के लिए प्रस्तावित तकनीकी मानकों को वैश्विक मान्यता दे दी है। अब भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो भविष्य की इंटरनेट तकनीक (6G) की दिशा और नियम तय कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • स्वदेशी तकनीक का दबदबा: भारतीय वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स ने 6G से जुड़े 200 से अधिक पेटेंट हासिल किए हैं। इनमें टेराहर्ट्ज़ (THz) कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंट रिफ्लेक्टिव सरफेस जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।

  • अतुलनीय गति: 6G तकनीक 5G की तुलना में 100 गुना अधिक तेज़ होगी, जिससे 'होलोग्राफिक कॉलिंग' और 'स्मार्ट एआई-सिटी' का संचालन संभव हो सकेगा।

  • लागत में कमी: चूंकि मानक और तकनीक भारतीय हैं, इसलिए भविष्य में 6G उपकरणों के लिए विदेशी कंपनियों को रॉयल्टी नहीं देनी होगी, जिससे आम जनता के लिए डेटा और कॉलिंग बहुत सस्ती रहेगी।

  • 2030 का लक्ष्य: संचार मंत्रालय ने 2030 तक देश के सभी प्रमुख शहरों में 6G कमर्शियल लॉन्च का रोडमैप तैयार कर लिया है।

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