नई दिल्ली (20 मार्च 2026): प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल कुवैत के नेतृत्व को ईद-उल-फितर की अग्रिम शुभकामनाएं दीं, बल्कि क्षेत्र में शांति बहाली के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
1. क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का समर्थन
कड़ी निंदा: पीएम मोदी ने कुवैत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हुए किसी भी प्रकार के हमले या उल्लंघन की भारत की ओर से स्पष्ट शब्दों में निंदा की।
कूटनीतिक संदेश: भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह खाड़ी देशों की सीमाओं के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन का पक्षधर है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर चिंता
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (होर्मुज जलडमरूमध्य) खतरे में है।
सर्वोच्च प्राथमिकता: दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि इस जलमार्ग से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन (Safe and Free Navigation) सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
3. भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए आभार
कुवैत में लाखों की संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा योगदान देते हैं।
सुरक्षा का आश्वासन: पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस का आभार व्यक्त किया कि संकट की इस घड़ी में भी कुवैत सरकार भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई का पूरा ध्यान रख रही है।
4. 'संवाद और कूटनीति' ही एकमात्र रास्ता
दोनों दिग्गज नेता इस बात पर सहमत हुए कि युद्ध की स्थिति को टालने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के लिए निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव (Diplomatic Engagement) अनिवार्य है।
प्रमुख बिंदु (Quick Highlights):
| विषय | विवरण |
| नेताओं के बीच वार्ता | PM मोदी और क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद |
| मुख्य मुद्दा | पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा |
| शुभकामनाएं | आगामी ईद-उल-फितर के लिए हार्दिक बधाई |
| भारत का रुख | कुवैत की संप्रभुता का पूर्ण समर्थन और शांति की अपील |
निष्कर्ष: खाड़ी देशों के साथ भारत के मजबूत होते रिश्ते
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ओमान के बाद अब कुवैत के नेतृत्व से बात करना यह दर्शाता है कि भारत मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और अपने ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए एक 'विश्व मित्र' की भूमिका बखूबी निभा रहा है।
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