माजुली: आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर गौरव गोगोई ने भाजपा के भीतर हो रहे दलबदल को मुख्य मुद्दा बनाया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अब अपनी मूल पहचान खो चुकी है और पूरी तरह कांग्रेस से आए नेताओं के भरोसे चल रही है।
गौरव गोगोई के बयान के मुख्य बिंदु:
भाजपा का 'लेबल': गोगोई ने कहा कि असम में भाजपा केवल नाम की रह गई है। असल में यह वही पुराने कांग्रेस नेता हैं जो अब भाजपा का 'टैग' लगाकर सत्ता में बैठे हैं।
विरासत की लड़ाई: उन्होंने आगामी चुनाव को दिवंगत तरुण गोगोई (उनके पिता और पूर्व सीएम) की 'मूल कांग्रेस' और हिमंत विश्व शर्मा की 'नई कांग्रेस' (जो अब भाजपा का मुखौटा पहने है) के बीच का मुकाबला बताया।
भ्रष्टाचार पर निशाना: गौरव ने आरोप लगाया कि तरुण गोगोई के कार्यकाल में जो नेता गलत कामों में लिप्त थे, वे आज भाजपा में शामिल होकर खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
असम भाजपा में बढ़ता 'कांग्रेसी' प्रभाव?
असम की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्तर पर दलबदल हुआ है, जिसने समीकरण बदल दिए हैं:
हिमंत विश्व शर्मा: 2015 में तरुण गोगोई से मतभेद के बाद कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए और अब मुख्यमंत्री हैं।
हालिया झटके: हाल ही में कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई के साथ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा का भाजपा में शामिल होना राज्य कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
राजनीतिक निहितार्थ:
गौरव गोगोई के इस बयान का उद्देश्य उन मूल भाजपा कार्यकर्ताओं (Core Ideology) को असहज करना है जो कांग्रेस से आए नेताओं के बढ़ते वर्चस्व से असंतुष्ट हो सकते हैं। साथ ही, वे मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान भाजपा सरकार केवल 'पुरानी कांग्रेस' का बदला हुआ रूप है।
Powered by Froala Editor




