छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक सदमे जैसी घटना सामने आई है, जिसमें किसानों को लोन और सब्सिडी का लालच देकर लगभग ₹35 लाख की ठगी की गई। बात ऐसी है कि ठगों ने नाबार्ड अधिकारी बनकर पेश आकर मछली पालन-फेंसिंग योजनाओं में 90% सब्सिडी का झांसा दिया और इसके बदले में रकम वसूल कर फरार हो गए।
ठगी की योजना और modus operandi
ठगों ने नकली परिचय और प्रमाण दिखाकर किसानों को विश्वास दिलाया कि वे नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) के अधिकारी हैं।
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि किसानों को मछली पालन और फेंसिंग (बाड़बंदी) योजना के लिए भारी सब्सिडी मिलेगी — जो १०० प्रतिशत लागत की ९०% तक हो सकती है।
किसान इस संभव सुविधा को देखकर रुचिकर परियोजना में निवेश करने लगे।
ठगों ने किसानों से अग्रिम राशि वसूलना शुरू कर दिया। बड़े- बड़े चेक, नकदी लेनदेन और अन्य भुगतान किये गए।
इसके बाद ठग अचानक गायब हो गए और किसानों से सम्पर्क टूट गया। किसानों को समझ नहीं आया कि पैसा कहां गया।
ठगी का प्रभाव और जड़ें
किसानों ने अपनी साविफ्त जमा कर रखी रकम गंवाई — जो किसी के लिए बड़ी राशि होती है और खेती या घर की ज़रूरतों पर निर्भर हो सकती है।
इस तरह की ठगी विशेष रूप से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले किसानों को प्रभावित करती है, जिनके पास पूंजी कम होती है और जोखिम बहुत अधिक।
धोखाधड़ी इस स्तर पर हुई कि ठगों ने योजनाओं और सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता का फायदा उठाया।
किसानों में विश्वास संकट में गया — अब वे किसी योजना या सरकारी मदद पर संदेह करने लगे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच
स्थानीय प्रशासन और पुलिस को आवेदन मिला, और मामले की शिकायत दर्ज की गई।
मामले की गंभीरता देखते हुए जांच अधिकारी इसे प्राथमिकता देने का निर्देश दे चुके हैं।
पुलिस इसे “आर्थिक अपराध” की श्रेणी में ले रही है और ठगों के ठिकानों, बैंक लेनदेन और डिजिटल ट्रेल की खोज को सक्रिय किया गया है।
यह देखा जा रहा है कि ठगों ने किस तरह पहचान बनाई, किन खातों में ट्रांज़ैक्शन किया और किस माध्यम से किसानों को फंसाया।
सतर्कता के उपाय और सीख
किसी भी योजना में पैसा देने से पहले सत्यापन करना ज़रूरी है — संस्था की असली पहचान, पंजीकरण, सरकारी वेबसाइट, प्रमाण पत्र आदि।
“90% सब्सिडी” जैसे बड़े दावे सुनने में ही संदेह उत्पन्न करते हैं — ये आसान नहीं होते।
किसानों को समूह, पंचायत या कृषि विभाग से सलाह लेनी चाहिये, और बड़े लेनदेन के समय समर्थक गवाहों को शामिल करना चाहिये।
नकदी और चेक के लेनदेन की रसीद और दस्तावेज संभालना बेहद ज़रूरी है।
यदि कोई अधिकारी पहचान देता है, तो उसकी पृष्ठभूमि और प्रमाण पत्र जाँचना चाहिये।
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