नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों की दूसरी सूची सांसदों को मैदान में उतारने के पेच में फंस गई है। कन्नूर से सांसद के. सुधाकरन की बगावती तेवरों ने पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सुधाकरन ने 'अलविदा' तक कह दिया था, जिसके बाद ए. के. एंटनी जैसे वरिष्ठ नेताओं को बीच-बचाव के लिए उतरना पड़ा।
विवाद के मुख्य कारण और समीकरण:
सांसदों की 'विधानसभा' दौड़: के. सुधाकरन (कन्नूर), अडूर प्रकाश, के. सुरेश (लोकसभा मुख्य सचेतक), शफी परम्बिल और एम.के. राघवन जैसे कम से कम 5 बड़े सांसद विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।
लोकसभा सीट खोने का डर: आलाकमान और के.सी. वेणुगोपाल इस पक्ष में नहीं हैं कि सांसदों को लड़ाया जाए, क्योंकि इससे राज्य में कई लोकसभा उपचुनाव होंगे। कांग्रेस संसद के निचले सदन में अपनी एक भी सीट जोखिम में नहीं डालना चाहती।
सतीशन का कड़ा विरोध: केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने सांसदों को टिकट देने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध किया है। उनका मानना है कि इससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा और उपचुनावों का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
सुधाकरन की नाराजगी: सुधाकरन कन्नूर सीट से लड़ना चाहते हैं। दिल्ली में मीडिया को संबोधित करने से ठीक पहले ए.के. एंटनी के हस्तक्षेप और "विशेष आश्वासन" के बाद उन्होंने अपना फैसला टाला है।
कांग्रेस की वर्तमान स्थिति (केरल 2026):
| विवरण | संख्या/तिथि |
| कुल सीटें (कांग्रेस लड़ रही है) | 92 |
| पहली सूची में घोषित उम्मीदवार | 55 |
| नामांकन की अंतिम तिथि | 23 मार्च, 2026 |
| मतदान की तिथि | 9 अप्रैल, 2026 |
| नतीजे | 4 मई, 2026 |
रणनीतिक मायने:
केरल में यूडीएफ (UDF) के लिए यह चुनाव सत्ता वापसी का बड़ा मौका है। ऐसे में के.सी. वेणुगोपाल की राज्य की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी और सांसदों की गुटबाजी पार्टी की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। यदि सुधाकरन जैसे नेता नाराज रहते हैं, तो कन्नूर और आसपास के इलाकों में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।
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