तिरुवनंतपुरम (2 अप्रैल 2026): केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अशोक गहलोत ने वामपंथी सरकार (LDF) की स्वास्थ्य नीति पर कड़ा प्रहार किया।
1. राजस्थान की उपलब्धियों का दावा (Health Leader):
गहलोत ने तर्क दिया कि कांग्रेस शासन के दौरान राजस्थान ने स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं:
स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health): राजस्थान देश का पहला राज्य बना जिसने इस कानून को लागू कर स्वास्थ्य को एक बुनियादी अधिकार बनाया।
चिरंजीवी योजना: इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज और 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलता है।
आंकड़े: उन्होंने दावा किया कि अब तक 50 लाख मरीजों को लाभ मिला है और लगभग 5,000 करोड़ रुपये का मुफ्त इलाज प्रदान किया जा चुका है।
2. केरल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल:
गहलोत ने केरल की पारंपरिक रूप से मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में गिरावट का आरोप लगाया:
कुशासन का आरोप: उन्होंने कहा कि वर्तमान वामपंथी सरकार के "कुशासन" के कारण केरल का वह गौरव कम हुआ है जिसके लिए वह वैश्विक स्तर पर जाना जाता था।
यूडीएफ का वादा: उन्होंने संकेत दिया कि यदि यूडीएफ सत्ता में आती है, तो राजस्थान की तर्ज पर केरल में भी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ और किफायती बनाया जाएगा।
तुलनात्मक विश्लेषण: राजस्थान vs केरल स्वास्थ्य मॉडल
| विशेषता | राजस्थान मॉडल (गहलोत का दावा) | केरल मॉडल (पारंपरिक छवि) |
| मुख्य योजना | चिरंजीवी बीमा योजना (25 लाख कवर) | सार्वजनिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs) का मजबूत नेटवर्क |
| कानूनी आधार | स्वास्थ्य का अधिकार (RTH) कानून | विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य शासन (Panchayat level) |
| वर्तमान स्थिति | कैशलेस और निजी अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क | विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बुनियादी ढांचे पर दबाव (विपक्ष का आरोप) |
निष्कर्ष और राजनीतिक निहितार्थ:
अशोक गहलोत का यह बयान केरल के मतदाताओं, विशेषकर मध्यम वर्ग को लुभाने की कोशिश है, जो निजी अस्पतालों के बढ़ते खर्च से परेशान हैं। केरल में स्वास्थ्य हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है, और अब 'राजस्थान मॉडल' की एंट्री ने एलडीएफ (LDF) को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।
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