चेन्नई। इंडियन प्रीमियर प्रीमियर लीग (IPL) के नए सीजन के आगाज से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट जगत से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारत के पूर्व दिग्गज लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन (Laxman Sivaramakrishnan) ने अपने 23 साल लंबे कॉमेंट्री करियर को अलविदा कह दिया है। हालांकि, उनका यह संन्यास सामान्य नहीं है; उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के कॉमेंट्री पैनल से खुद को अलग करते हुए सिस्टम पर "रंगभेद" (Racism) और "भेदभाव" जैसे संगीन आरोप जड़े हैं।
23 साल का सफर और अचानक विदाई
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन, जो अपनी सटीक स्पिन और फिर माइक्रोफोन पर अपनी धारदार आवाज के लिए जाने जाते थे, ने सोशल मीडिया के जरिए इस फैसले की पुष्टि की। उनके इस अचानक फैसले ने क्रिकेट फैंस और साथी कॉमेंटेटर्स को हैरान कर दिया है।
"रंगभेद" और "सिस्टम का पक्षपात": क्या है पूरा विवाद?
शिवरामकृष्णन ने अपने संन्यास के पीछे की कड़वाहट को उजागर करते हुए कई बड़े खुलासे किए हैं:
टॉस और प्रेजेंटेशन से दूरी: उन्होंने आरोप लगाया कि इतने वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें टॉस या पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन (मैच के बाद का कार्यक्रम) जैसे प्रमुख मौकों के लिए जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता था।
जूनियर्स को प्राथमिकता: उन्होंने दावा किया कि जब वरिष्ठ कॉमेंटेटर्स उपलब्ध नहीं होते थे, तब भी उन्हें मौका देने के बजाय जूनियर या पसंदीदा चेहरों को आगे बढ़ाया जाता था।
रंगभेद पर मुहर: सोशल मीडिया पर एक यूजर द्वारा जब "रंगभेद" को इस भेदभाव का कारण बताया गया, तो शिवरामकृष्णन ने सीधे तौर पर सहमति जताते हुए लिखा— "आप सही हैं, रंगभेद।"
"अभी तो कहानी शुरू हुई है": बड़े खुलासे के संकेत
शिवरामकृष्णन ने केवल संन्यास का ऐलान ही नहीं किया, बल्कि यह भी चेतावनी दी है कि वह जल्द ही कुछ और बड़े राज खोल सकते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
"मेरा संन्यास एक बड़ी कहानी की शुरुआत है। जब यह पूरी कहानी सामने आएगी, तो क्रिकेट फैंस और आम लोग दंग रह जाएंगे।"
उनके इस बयान से संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में बीसीसीआई के कॉमेंट्री पैनल के भीतर चलने वाली राजनीति और चयन प्रक्रिया पर कई और सवाल उठ सकते हैं।
क्रिकेट करियर पर एक नजर
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने भारत के लिए 9 टेस्ट और 16 वनडे मैच खेले थे। 1985 की 'वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट' में उनकी जादुई स्पिन ने भारत को खिताबी जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। खेल से संन्यास के बाद, वह पिछले दो दशकों से अधिक समय से भारतीय क्रिकेट की आवाज बने हुए थे।
Powered by Froala Editor




