हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आरंभ होता है। इस साल माता रानी का आगमन पालकी पर हो रहा है, जो शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कलश स्थापना (घटस्थापना) मुहूर्त: 19 मार्च 2026
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। इस वर्ष दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:
प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:52 AM से 09:44 AM तक।
अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 11:20 AM से 12:09 PM तक।
विशेष: प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे शुरू होगी।
8 दिनों की नवरात्रि: तिथियों का विवरण
इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन (26 मार्च) पड़ने के कारण नवरात्रि 8 दिनों की होगी:
| तिथि | दिन | माता का स्वरूप / उत्सव |
| 19 मार्च | गुरुवार | मां शैलपुत्री (कलश स्थापना) |
| 20 मार्च | शुक्रवार | मां ब्रह्मचारिणी |
| 21 मार्च | शनिवार | मां चंद्रघंटा |
| 22 मार्च | रविवार | मां कुष्मांडा |
| 23 मार्च | सोमवार | मां स्कंदमाता |
| 24 मार्च | मंगलवार | मां कात्यायनी |
| 25 मार्च | बुधवार | मां कालरात्रि (सप्तमी) |
| 26 मार्च | गुरुवार | महाष्टमी (महागौरी) एवं राम नवमी |
महाष्टमी और राम नवमी का महासंगम
पंचांग के अनुसार, 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे के बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी।
राम जन्मोत्सव: भगवान श्री राम का जन्म दोपहर 12:00 बजे (अभिजीत मुहूर्त) में इसी दिन मनाया जाएगा।
हवन: नवमी तिथि शुरू होने के कारण 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे के बाद ही हवन करना शास्त्र सम्मत होगा।
व्रत पारण और विदाई
पारण तिथि: नवरात्रि व्रत का पारण 27 मार्च 2026 को सुबह 10:08 AM के बाद किया जाएगा।
माता की विदाई: इस वर्ष माता की विदाई हाथी पर होगी, जो आने वाले समय में अच्छी वर्षा और सुख-संपन्नता का संकेत है।
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