रायपुर, छत्तीसगढ़। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कोयला घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए जयचंद कोशले को गिरफ्तार किया है। जयचंद सौम्या चौरसिया के करीबी माने जाते हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रह चुकी हैं। उनके रायपुर और जांजगीर-चांपा स्थित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कोयला घोटाले से जुड़े कई अहम दस्तावेज और करीब 50 करोड़ रुपये के खपाने के सबूत मिले हैं।

जयचंद की गिरफ्तारी के बाद सोमवार को विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें 26 सितंबर तक पांच दिन की रिमांड पर लेने का अनुरोध किया गया है। उनके खिलाफ रिमांड मांगी गई है ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके और मामले के दफन राज उजागर किए जा सकें।

जानकारी के मुताबिक जयचंद कोशले एक समय रायपुर नगर निगम के कर्मचारी थे। वर्ष 2018-19 में जब सौम्या चौरसिया रायपुर निगम में अपर आयुक्त थीं, तब जयचंद उनके निजी सहायक के रूप में काम करने लगे। कांग्रेस सरकार बनने के बाद जब सौम्या मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव बनीं, तब जयचंद भी उनकी कार्यालय में जुड़े और वित्तीय लेनदेन तथा निवेश का काम संभाला।

जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि अवैध कोयला परिवहन से होने वाली रकम जयचंद के माध्यम से सौम्या तक पहुंचाई जाती थी। जयचंद ने खुद इस घोटाले से 10 करोड़ रुपए से अधिक कमाई की है और उन्होंने रायपुर के सेजबहार कालोनी में आलीशान मकान के साथ-साथ जांजगीर-चांपा में पैतृक संपत्ति समेत करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है।

वर्तमान में सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से मार्च 2025 में अंतरिम जमानत मिली हुई है, जिसके बाद वह निलंबित अन्य अधिकारियों के साथ जेल से रिहा हो चुकी हैं। हालांकि जमानत की शर्तों के तहत उन्हें छत्तीसगढ़ में रहने की अनुमति नहीं है।

इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि कोयला घोटाले की जांच धाराप्रवाह जारी है और संबंधित सभी पक्षों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। EOW का उद्देश्य इस भ्रष्टाचार के मामले को पूरी तरह उजागर कर दोषियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना है।


इस प्रकार जयचंद कोशले की गिरफ्तारी और जांच से छत्तीसगढ़ के कोयला घोटाले में जांच की गहनता और प्रभावशीलता का पता चलता है, जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रशासन की सख्त कार्रवाई की मिसाल है।

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