छत्तीसगढ़ के रायपुर में कोयला घोटाले की जांच में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जयचंद कोसले को गिरफ्तार किया है। जयचंद कोसले पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया के निजी सचिव के रूप में कार्य करते हुए अवैध कोयला परिवहन से प्राप्त 50 करोड़ रुपये की राशि का निवेश किया।
🕵️♂️ गिरफ्तारी और रिमांड
EOW ने जयचंद कोसले के रायपुर और जांजगीर-चांपा स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कोयला घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और 50 करोड़ रुपये की काली कमाई को छिपाने के सबूत मिले। गिरफ्तारी के बाद, उसे विशेष कोर्ट में पेश कर पूछताछ के लिए 26 सितंबर तक पांच दिन की रिमांड पर लिया गया है।
📂 सौम्या चौरसिया से संबंध
जांच में यह सामने आया है कि अवैध कोयला परिवहन से प्राप्त राशि जयचंद कोसले के माध्यम से सौम्या चौरसिया तक पहुंचती थी। जयचंद ने खुद 10 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की और रायपुर की सेजबहार कालोनी में आलीशान मकान और जांजगीर-चांपा के अकलतरा में पैतृक घर सहित करोड़ों की संपत्ति बनाई।
🏛️ प्रशासनिक पृष्ठभूमि
जयचंद कोसले रायपुर नगर निगम में सहायक खनिज संचालक के पुत्र के रूप में कार्यरत थे। वर्ष 2018-19 में, जब सौम्या चौरसिया रायपुर निगम में अपर आयुक्त थीं, तब जयचंद उनके निजी सहायक (PA) के रूप में कार्य करने लगे। कांग्रेस सरकार बनने के बाद, सौम्या जब मुख्यमंत्री बघेल की उप सचिव बनीं, तो जयचंद की पोस्टिंग भी वहीं कर दी गई। सरकार बदलने के बाद भी, जयचंद ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के बंगले में अपनी पोस्टिंग कराई और वहीं उनका काम देखने लगे।
🧾 ईडी की पूछताछ
ईडी ने भी जयचंद को कई बार पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी को संदेह है कि जयचंद ने सौम्या चौरसिया की काली कमाई के करोड़ों रुपये का निवेश किया है। जयचंद के घर से जब्त संपत्ति के दस्तावेज इस ओर इशारा कर रहे हैं।
🕊️ निष्कर्ष
जयचंद कोसले की गिरफ्तारी कोयला घोटाले में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही हैं। आगे की पूछताछ से इस मामले में और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की संभावना है।
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