नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट और सकल जैन समाज, दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक गुरुओं और राजनेताओं ने एक साझा मंच से वैश्विक शांति का संदेश दिया।
1. विधानसभा अध्यक्ष: 'अनेकांतवाद' ही लोकतंत्र की आत्मा
अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जैन दर्शन के 'अनेकांतवाद' (सत्य की बहुलता) को लोकतांत्रिक मर्यादा से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण बातें कहीं:
विविधता की ताकत: उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद (Ideological differences) लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी असली ताकत हैं।
दृष्टिकोण का सम्मान: सत्य के कई पहलू होते हैं, इसलिए दूसरों के नजरिए का सम्मान करना ही लोकतंत्र का सच्चा सार है।
युवाओं को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे महावीर की शिक्षाओं को केवल धार्मिक कर्मकांड न मानकर, एक 'आधुनिक जीवन शैली' के रूप में अपनाएं।
2. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: जैन दर्शन एक 'प्रैक्टिकल रोडमैप'
मुख्यमंत्री ने वर्तमान की 'कठिन परिस्थितियों' में संयम के महत्व पर प्रकाश डाला:
अहिंसा और शांति: उन्होंने कहा कि महावीर का मार्ग केवल उपदेश नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और मानवीय गरिमा के लिए एक व्यावहारिक समाधान है।
संयम का मार्ग: मोह-माया और अशांति के दौर में सही-गलत का भेद करना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में महावीर का 'संयम' ही सच्चा मार्गदर्शक है।
3. धर्मगुरुओं का आह्वान और वैश्विक संदेश:
कार्यक्रम में उपस्थित आध्यात्मिक गुरुओं ने मानवता को जोड़ने का सूत्र दिया:
आचार्य लोकेश मुनि: उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' के संकल्प को दोहराया और वैश्विक शांति के लिए पूरी मानवता को एक सूत्र में बंधने का आह्वान किया।
प्रज्ञा सागर महाराज: उन्होंने महावीर और हनुमान जी की तपस्या की तुलना करते हुए जीवन जीने की कला सिखाई। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से 'सेवा परमो धर्म:' को अपना आदर्श वाक्य बनाने का आग्रह किया।
निष्कर्ष:
दिल्ली विधानसभा परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि इसने सत्ता के गलियारे से यह संदेश भी दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सहिष्णुता और दूसरों के विचारों का सम्मान अनिवार्य है। हनुमान जन्मोत्सव और महावीर जयंती के इस संयोग ने 'तप और सेवा' के साझा मूल्यों को और मजबूती दी।
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