वॉशिंगटन/बेंगलुरु (3 अप्रैल 2026): वैज्ञानिकों ने सूर्य की सतह पर एक विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CME) दर्ज किया है, जो अगले 24 से 48 घंटों में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है। नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यह सौर तूफान 2026 का अब तक का सबसे शक्तिशाली तूफान हो सकता है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • तकनीकी बाधाएं: सौर तूफान के कारण पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स प्रभावित हो सकते हैं। इससे जीपीएस (GPS) नेविगेशन, रेडियो संचार और मोबाइल नेटवर्क में अस्थायी व्यवधान आने की प्रबल संभावना है।

  • पावर ग्रिड पर खतरा: उच्च-तीव्रता वाले सौर तूफान पृथ्वी पर बिजली के ग्रिडों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। 2026 में बढ़ी हुई सौर गतिविधियों को देखते हुए पावर कंपनियों को 'बैकअप' मोड पर रहने को कहा गया है।

  • अरोड़ा (Auroras) का नजारा: इस तूफान के सकारात्मक पक्ष के रूप में, उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के पास रहने वाले लोगों को आसमान में अद्भुत रंगीन रोशनियाँ (Northern Lights) देखने को मिलेंगी। संभावना है कि इस बार ये रोशनियाँ न्यूयॉर्क और लंदन जैसे शहरों तक भी दिखाई दें।

  • इसरो (ISRO) की निगरानी: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अपने सौर मिशन 'आदित्य-L1' के जरिए इस तूफान की बारीकी से निगरानी कर रही है ताकि भारतीय सैटेलाइट्स को सुरक्षित रखा जा सके।

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