नयी दिल्ली: कॉरपोरेट मामलों के राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा ने संसद में स्पष्ट किया कि पीएमआई योजना का उद्देश्य सीधे नौकरी देना नहीं, बल्कि युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाना है। नौ मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के दोनों चरणों में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन 'ड्रॉप-आउट' (बीच में छोड़ना) की दर ने नीति निर्माताओं का ध्यान खींचा है।
PMI योजना: अब तक का सफर (आंकड़े मार्च 2026 तक)
| विवरण | पहला चरण (अक्टूबर 2024) | दूसरा चरण (जनवरी 2025) |
| कुल उम्मीदवार (आवेदन) | 1.81 लाख+ | 2.14 लाख+ |
| कंपनियों के प्रस्ताव | 82,000+ | 83,000+ |
| वास्तविक इंटर्न (शामिल हुए) | 8,760 | 7,300+ |
| पूरा करने वाले (9 मार्च तक) | 3,605 | (अप्रैल 2026 से शुरू होगा) |
बजट और वित्तीय सहायता में बड़ा बदलाव:
स्टाइपेंड में वृद्धि: सरकार ने मार्च 2026 से मासिक वित्तीय सहायता को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया है। यह कदम संभवतः इंटर्नशिप छोड़ने वाले युवाओं को रोकने और उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए उठाया गया है।
बजट आवंटन: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना हेतु ₹10,831.07 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। हालांकि, पायलट प्रोजेक्ट होने के कारण वास्तविक व्यय अभी कम (लगभग ₹87.46 करोड़) अनुमानित है।
पायलट प्रोजेक्ट: मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्य योजना अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुई है और फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट ही जारी रखा गया है ताकि अनुभवों के आधार पर सुधार किया जा सके।
इंटर्नशिप छोड़ने के संभावित कारण और भविष्य:
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर्नशिप के बीच में ही खत्म होने के पीछे कार्यस्थल की दूरी, उच्च शिक्षा के अवसर या बेहतर वेतन वाली नौकरियों का मिल जाना मुख्य कारण हो सकते हैं। ₹9,000 की नई स्टाइपेंड राशि अब इसे कई अन्य प्रवेश स्तर की नौकरियों के समकक्ष खड़ा कर देगी, जिससे युवाओं का जुड़ाव बढ़ेगा।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना भारत के कार्यबल को 'इंडस्ट्री-रेडी' बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल है। स्टाइपेंड में लगभग 80% की वृद्धि यह दर्शाती है कि सरकार युवाओं की प्रतिक्रिया के आधार पर योजना में लचीला बदलाव करने के लिए तैयार है।
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