कोलकाता (3 अप्रैल 2026): भवानीपुर की सड़कें आज उस समय जंग का मैदान बन गईं जब अमित शाह के मेगा रोड शो और शुभेंदु अधिकारी के नामांकन के दौरान भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।
1. अमित शाह का 'मिशन बंगाल' और 15 दिन का डेरा:
रणनीति: शाह ने स्पष्ट किया है कि वे अगले दो सप्ताह बंगाल के हर जिले में पहुंचेंगे। उनका लक्ष्य टीएमसी के 'संगठनात्मक ढांचे' को चुनौती देना है।
हुंकार: रोड शो के दौरान शाह ने कहा कि "ममता सरकार की विदाई का समय आ गया है" और भाजपा बंगाल को 'सोनार बांग्ला' बनाने के अपने वादे पर अडिग है।
2. भवानीपुर में तनाव: 'कालीघाट' के पास विरोध प्रदर्शन:
काले झंडे: जब शाह का काफिला ममता बनर्जी के निवास (कालीघाट) के करीब पहुँचा, तो टीएमसी समर्थकों ने "अमित शाह गो बैक" के नारे लगाए और काले कपड़े दिखाकर विरोध किया।
हिंसा: दोनों पक्षों के बीच हुई झड़प के बाद पुलिस को लाठीचार्ज की स्थिति तक पहुँचना पड़ा। भवानीपुर अब इस चुनाव का सबसे संवेदनशील केंद्र बन चुका है।
3. डॉ. मोहन यादव (CM, मध्यप्रदेश) का 'हिंदुत्व' कार्ड:
बांकुड़ा में हुंकार: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बांकुड़ा की नामांकन रैली में घुसपैठ और हिंदू अस्मिता का मुद्दा उठाया।
बयान: उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ममता सरकार ने घुसपैठियों को बढ़ावा देकर राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) और हिंदुओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है।
भवानीपुर: ममता vs शुभेंदु (एक साख की लड़ाई)
| पक्ष | मुख्य ताकत | चुनौती |
| ममता बनर्जी (TMC) | 'जय बांग्ला' का नारा और महिला वोट बैंक। | एंटी-इंकंबेंसी और शुभेंदु अधिकारी का आक्रामक प्रचार। |
| शुभेंदु अधिकारी (BJP) | नंदीग्राम की जीत का आत्मविश्वास और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व। | भवानीपुर में ममता बनर्जी का पुराना और मजबूत स्थानीय जनाधार। |
निष्कर्ष: क्या 2026 में होगा 'तख्तापलट'?
अमित शाह की मौजूदगी और शुभेंदु अधिकारी की भवानीपुर से दावेदारी ने इस चुनाव को "पर्सनल वॉर" बना दिया है। भाजपा जहाँ 'हिंदुत्व और भ्रष्टाचार' को मुद्दा बना रही है, वहीं टीएमसी इसे 'बाहरी बनाम बंगाली अस्मिता' की लड़ाई बता रही है। 2021 में नंदीग्राम में जो हुआ, क्या 2026 में भवानीपुर में उसका दोहराव होगा? यह सवाल पूरे देश की राजनीति के केंद्र में है।
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