सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाँ 'विलफुल डिफॉल्टर्स' के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है, वहीं डिजिटल भुगतान को सुरक्षित बनाने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) का उपयोग किया जा रहा है।
1. शीर्ष 10 'विलफुल डिफॉल्टर्स' (31 मार्च 2025 तक)
उन इकाइयों की सूची जिन्होंने सक्षम होने के बावजूद बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया:
| स्थान | इकाई/कंपनी का नाम | बकाया राशि (₹ करोड़) |
| 1 | एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड | 6,695 |
| 2 | गीतांजलि जेम्स | 6,236 |
| 3 | बीटा नेफ्थोल | 5,268 |
| 4 | राकेशकुमार कुलदीपसिंह वधावन | 4,291 |
| 5 | भूषण पावर एंड स्टील (पूर्व निदेशक) | 3,810 |
| 6 | रजा टेक्सटाइल्स | 3,260 |
| 7 | गिल्ट पैक | 3,080 |
| 8 | रैंक इंडस्ट्रीज | 2,655 |
| 9 | HDIL (हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) | 2,540 |
आरबीआई का निर्देश: बैंकों को इन चूककर्ताओं की सूची हर महीने क्रेडिट सूचना कंपनियों (CICs) को सौंपनी होगी ताकि इसे सार्वजनिक किया जा सके।
2. डिजिटल भुगतान: भारत की वैश्विक सफलता
डिजिटल लेन-देन में पिछले तीन वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है:
लेन-देन की मात्रा: खुदरा डिजिटल भुगतान वित्त वर्ष 2022 के ₹457.44 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में ₹849.12 लाख करोड़ हो गया है।
UPI का दबदबा: कुल खुदरा डिजिटल भुगतान में 81% हिस्सा अकेले UPI का है। भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम खुदरा भुगतान प्रणाली संचालित कर रहा है।
3. सुरक्षा और धोखाधड़ी की निगरानी (AI आधारित)
बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ धोखाधड़ी से निपटने के लिए सरकार ने कई तकनीकी सुरक्षा चक्र तैयार किए हैं:
धोखाधड़ी निगरानी (Fraud Monitoring): एनपीसीआई (NPCI) बैंकों को AI/Machine Learning आधारित समाधान प्रदान करता है, जो संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर उन्हें तुरंत 'अस्वीकार' कर देते हैं।
डिवाइस बाइंडिंग: सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्राहक के मोबाइल नंबर और उपकरण (Device) को लिंक किया गया है।
सुरक्षा उपाय: दैनिक लेनदेन सीमा (Daily Limit), पिन-आधारित प्रमाणीकरण और विशिष्ट उपयोगों पर प्रतिबंध जैसे सुरक्षा फीचर्स लागू किए गए हैं।
जागरूकता: आरबीआई और बैंक एसएमएस और रेडियो के माध्यम से साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
निष्कर्ष:
वित्त मंत्री की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि जहाँ एक तरफ सरकार बड़े कर्जदारों से वसूली के लिए पारदर्शिता और सख्त निगरानी का उपयोग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों के लिए बैंकिंग को अधिक सुलभ और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का विस्तार कर रही है। ₹849 लाख करोड़ का डिजिटल लेन-देन भारत की आर्थिक प्रगति का एक बड़ा सूचक है।
Powered by Froala Editor




