मुंबई (4 अप्रैल 2026): विज्ञापनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 'एआई-इन्फ्लुएंसर्स' के बढ़ते चलन को देखते हुए ASCI ने नई आचार संहिता जारी की है। अब यदि कोई ब्रांड विज्ञापन में असली इंसान के बजाय एआई से बने मॉडल का उपयोग करता है, तो उसे स्क्रीन पर स्पष्ट 'AI-Generated' लेबल दिखाना होगा।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • पारदर्शिता: उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जिस 'इन्फ्लुएंसर' को देख रहे हैं, वह वास्तविक व्यक्ति है या कंप्यूटर द्वारा बनाया गया अवतार।

  • डीपफेक पर रोक: मशहूर हस्तियों के एआई क्लोन का उपयोग बिना उनकी लिखित अनुमति और उचित रॉयल्टी के करना गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है।

  • भ्रामक दावे: एआई के जरिए दिखाए जाने वाले 'बिफोर-आफ्टर' (Before-After) परिणामों की सत्यता के लिए अब ब्रांड्स को वैज्ञानिक प्रमाण देने होंगे।

  • सजा: भ्रामक एआई विज्ञापन चलाने पर भारी जुर्माने और संबंधित प्लेटफॉर्म से विज्ञापन हटाने का सख्त निर्देश दिया गया है।

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