कीव/मॉस्को। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के दो साल से अधिक समय बीतने के बाद अब कूटनीतिक गलियारों में एक बार फिर 'शांति वार्ता' की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि उन्होंने निलंबित पड़ी वार्ता को गति देने और युद्ध समाप्ति की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका भेजा है। वहीं, रूस के राष्ट्रपति कार्यालय 'क्रेमलिन' ने भी संकेत दिए हैं कि जल्द ही अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ता का नया दौर शुरू हो सकता है।
जेलेंस्की की रणनीति: अमेरिका पर भरोसा
यूक्रेन के राष्ट्रपति अब इस युद्ध को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने बृहस्पतिवार देर रात पुष्टि की कि शनिवार को होने वाली संभावित बैठकों के लिए उनका दल वाशिंगटन पहुँच चुका है।
उद्देश्य: ठप पड़ी त्रिपक्षीय वार्ताओं को फिर से शुरू करना और पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता के साथ-साथ कूटनीतिक समर्थन हासिल करना।
व्हाइट हाउस का रुख: हालांकि जेलेंस्की ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है, लेकिन व्हाइट हाउस ने अभी तक किसी औपचारिक बैठक की पुष्टि नहीं की है।
क्रेमलिन का रुख: "वार्ता संभव, पर शर्तें बरकरार"
रूस के राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया दी:
मध्यस्थता: पेस्कोव ने संकेत दिया कि रूस वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल नई त्रिपक्षीय बैठक के समय और स्थान पर कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
सीधी भागीदारी: उन्होंने यह भी साफ किया कि रूस उन वार्ताओं का हिस्सा नहीं बनेगा जो उसकी शर्तों या सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करती हैं।
क्यों रुकी थी वार्ता?
पिछले कुछ समय से वैश्विक ध्यान यूक्रेन से हटकर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की ओर चला गया था। इस कारण यूक्रेन और रूस के बीच चल रही त्रिपक्षीय वार्ता ठप पड़ गई थी।
जमीनी हकीकत: वर्तमान में रूसी सेना का यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है।
यूरोपीय देशों के आरोप: यूरोपीय संघ के अधिकारियों का आरोप है कि पुतिन बातचीत में जानबूझकर देरी कर रहे हैं ताकि वे और अधिक यूक्रेनी क्षेत्रों पर कब्जा कर सकें।
क्या निकलेगा समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली यह नई पहल महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यूक्रेन के पास संसाधनों की कमी हो रही है और रूस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव बना हुआ है। शनिवार को वाशिंगटन में होने वाली हलचल इस युद्ध के भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
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