नयी दिल्ली (2 अप्रैल 2026): आईयूएमएल सांसद अब्दुल वहाब के तीखे सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन को सूचित किया कि भारत की कूटनीति पूरी तरह से द्विपक्षीय हितों और क्षेत्रीय शांति पर केंद्रित रही है।
1. मुख्य विवाद: क्या भारत को ईरान पर हमले की जानकारी थी?
सवाल: सांसद ने पूछा कि क्या 26 फरवरी को यात्रा समाप्त होने के ठीक अगले दिन ईरान पर हुए हमले के बारे में इजराइल ने भारत को कोई संकेत दिया था?
सरकारी जवाब: विदेश राज्य मंत्री ने लिखित उत्तर में स्पष्ट किया— "इस मामले से संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई।" भारत ने हमेशा तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का समर्थन किया है।
2. भारत-इजराइल शिखर सम्मेलन 2026: प्रमुख समझौते
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई व्यापक चर्चा के बाद कई भविष्योन्मुखी समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए:
| क्षेत्र | समझौते का मुख्य केंद्र (Focus Area) |
| तकनीक (Tech) | कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत साइबर सुरक्षा ढांचा। |
| अर्थव्यवस्था | डिजिटल भुगतान (UPI-इजराइल लिंक) और वित्तीय सेवाएं। |
| कृषि एवं संसाधन | मत्स्य पालन, जलीय कृषि और उन्नत सिंचाई तकनीक। |
| मानव संसाधन | भारतीय श्रमिकों की आवाजाही (Mobility) और शिक्षा सहयोग। |
3. कूटनीतिक संतुलन (The Balancing Act)
भारत के लिए यह यात्रा एक 'नाज़ुक संतुलन' (Tightrope Walk) की तरह थी:
इजराइल: भारत का एक प्रमुख रक्षा और तकनीक साझेदार है।
ईरान: ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से कनेक्टिविटी के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
रणनीति: सरकार ने सदन में यह संदेश दिया है कि इजराइल के साथ सहयोग बढ़ाने का मतलब यह नहीं है कि भारत किसी भी क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष या हमले का हिस्सा है या उसे इसकी पूर्व जानकारी थी।
निष्कर्ष:
विदेश मंत्रालय का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को दोहराता है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री की यात्रा पूरी तरह से आर्थिक और तकनीकी प्रगति के उद्देश्य से थी, न कि किसी सैन्य गठबंधन या युद्ध की पूर्व-सूचना साझा करने के लिए।
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