रायपुर (20 मार्च 2026): गुरुवार देर शाम शुरू हुआ यह घटनाक्रम शुक्रवार तड़के 3:00 बजे तक तनावपूर्ण बना रहा। जिला प्रशासन और पुलिस की भारी मौजूदगी के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
1. कैसे हुआ हादसा? (जहरीली गैस का कहर)
घटना: अस्पताल परिसर के भीतर गटर की नियमित सफाई का काम चल रहा था।
कारण: चश्मदीदों और शुरुआती जांच के अनुसार, टैंक के भीतर अत्यधिक जहरीली गैस (Toxic Gas) जमा थी। जैसे ही सफाई कर्मी नीचे उतरे, वे बेहोश हो गए और दम घुटने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुष्टि: अस्पताल के डॉक्टरों ने तीनों कर्मियों को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
2. परिजनों का आरोप: "शवों के साथ अमानवीय व्यवहार"
हादसे के बाद स्थिति तब और बिगड़ गई जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ:
कचरा गाड़ी का विवाद: परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता ताक पर रखकर मृतकों के शवों को सम्मानजनक एम्बुलेंस के बजाय कचरा ढोने वाली गाड़ी में डालकर बाहर निकाला।
लापरवाही: परिजनों ने आरोप लगाया कि कर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Mask/Oxygen Cylinder) के गटर में उतारा गया था।
3. 8 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा और पुलिस से झड़प
हंगामा: रात करीब 9 बजे से ही मृतकों के परिजन और समाज के लोग अस्पताल के मुख्य गेट पर जमा हो गए।
झड़प: गेट बंद किए जाने और अंदर जाने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई।
प्रशासनिक हस्तक्षेप: रात 3:00 बजे कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच समझौता वार्ता हुई। प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | रामकृष्ण केयर अस्पताल, पचपेड़ी नाका, रायपुर |
| मृतकों की संख्या | 03 (सफाई कर्मी) |
| कारण | सीवेज टैंक में जहरीली गैस से दम घुटना |
| आरोप | सुरक्षा उपकरणों का अभाव और शवों का अपमान |
| वर्तमान स्थिति | मामला शांत, न्यायिक जांच के आदेश |
निष्कर्ष: सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि 'हाथ से मैला ढोना' या बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवेज सफाई प्रतिबंधित है, राजधानी के एक बड़े अस्पताल में ऐसा हादसा होना सुरक्षा ऑडिट पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
Powered by Froala Editor




