देहरादून (4 अप्रैल 2026): उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद 'लिव-इन रिलेशनशिप' पंजीकरण के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। आधिकारिक वेबसाइट पर अब तक 10,000 से अधिक जोड़ों ने अपने संबंधों को कानूनी रूप से दर्ज कराया है।
विस्तृत विश्लेषण:
कानूनी बाध्यता: कानून के तहत, पंजीकरण न कराने वाले जोड़ों को 6 महीने तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी की निजता में दखल देना नहीं, बल्कि विशेष रूप से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और सामाजिक अधिकार देना है।
विवाद और स्पष्टीकरण: कुछ वर्गों ने इसे 'मोरल पुलिसिंग' करार दिया है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह डेटा केवल आपातकालीन स्थितियों (जैसे अपराध या उत्तराधिकार विवाद) में ही उपयोग किया जाएगा।
पैतृक संपत्ति का अधिकार: इस पंजीकरण के बाद लिव-इन से पैदा होने वाले बच्चों को पिता की संपत्ति में कानूनी रूप से समान उत्तराधिकार प्राप्त होगा।
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