श्रीनगर: घाटी भर में 'शब-ए-कद्र' (बरकत की रात) पूरी धार्मिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। रमजान के मुकद्दस महीने के समापन की ओर बढ़ते हुए, सोमवार रात हजारों की संख्या में मुसलमान मस्जिदों और दरगाहों में रात भर इबादत, कुरान की तिलावत और दुआओं के लिए एकत्र हुए।
प्रमुख इबादतगाहों का हाल:
हजरतबल दरगाह: डल झील के किनारे स्थित विश्व प्रसिद्ध हजरतबल दरगाह में सबसे बड़ा मजमा देखा गया। यहाँ पैगंबर मोहम्मद साहब के पवित्र अवशेष (मो-ए-मुकद्दस) के दर्शन और विशेष नमाज के लिए सैकड़ों जायरीन जुटे।
प्रमुख दरगाहें: दस्त-ए-गीर साहिब और सैयद याकूब शाह जैसी ऐतिहासिक दरगाहों पर भी रात भर रौनक रही और लोगों ने अमन-चैन की दुआएं मांगी।
जामिया मस्जिद और पाबंदियां:
इबादत के इस माहौल के बीच, श्रीनगर के नौहट्टा स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में सन्नाटा पसरा रहा।
नजरबंदी: प्रशासन के आदेश के बाद मस्जिद को बंद रखा गया और किसी भी सभा की अनुमति नहीं दी गई।
मीरवाइज उमर फारूक: कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक को भी उनके आवास पर नजरबंद किया गया, जिसके कारण वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रात की नमाज का नेतृत्व नहीं कर सके।
शब-ए-कद्र का महत्व:
इस्लामी मान्यता के अनुसार, रमजान की 26वीं तारीख की रात (27वां रोजा) को 'शब-ए-कद्र' माना जाता है। यह रात हजार महीनों से अफजल (बेहतर) मानी गई है, जिसमें पूरी रात जागकर खुदा की इबादत की जाती है।
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