रायपुर: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किए गए इस विधेयक पर सदन में करीब 5 घंटे की चर्चा हुई, जिसके बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री साय ने इसे "गरीबों और वंचितों की आस्था की रक्षा के लिए एक मजबूत ढाल" बताया है।
1. कानून के सख्त प्रावधान और दंड:
यह विधेयक अवैध धर्मांतरण को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध बनाता है।
| अपराध की श्रेणी | प्रस्तावित सजा |
| सामूहिक धर्मांतरण (दो या अधिक व्यक्ति) | आजीवन कारावास तक की सजा। |
| नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC का धर्मांतरण | 20 साल तक का कारावास। |
| सामान्य अवैध धर्मांतरण | कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान। |
| विवाह के माध्यम से धर्मांतरण | शादी को शून्य (अमान्य) घोषित करने का अधिकार। |
2. धर्मांतरण की नई और पारदर्शी प्रक्रिया:
अब राज्य में धर्म परिवर्तन करना एक लंबी और जांच आधारित प्रक्रिया होगी:
पूर्व सूचना अनिवार्य: धर्मांतरण कराने वाले (गुरु/संस्था) और धर्मांतरित होने वाले व्यक्ति, दोनों को जिला मजिस्ट्रेट या प्राधिकृत अधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी।
सार्वजनिक नोटिस: सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर जिला प्रशासन नोटिस जारी करेगा और इसे जिले की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा।
गहन जांच: प्राधिकृत अधिकारी एक माह के भीतर जांच करेंगे कि क्या यह निर्णय बिना किसी प्रलोभन, भय या दबाव के लिया गया है। अनुमति मिलने के बाद ही प्रक्रिया वैध मानी जाएगी।
3. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दृष्टिकोण:
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने 'X' (ट्विटर) और मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी:
"यह कानून उन लोगों पर लगाम कसेगा जो अशिक्षा और गरीबी का फायदा उठाकर लोगों का धर्म बदलवाते थे। हम धर्म रक्षा के अपने संकल्प को साकार कर रहे हैं। अब 'डिजिटल माध्यम' से होने वाले छल-कपट पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।"
4. राजनीतिक सरगर्मी और विपक्ष का रुख:
कांग्रेस का बहिष्कार: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस सदस्यों ने इसे प्रवर समिति (Select Committee) को भेजने की मांग की थी।
सदन से वॉकआउट: मांग पूरी न होने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।
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