नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में विभागीय सचिव श्री भुवनेश यादव की अध्यक्षता में जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्य की उच्च स्तरीय समीक्षा की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'छत्तीसगढ़ जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम, 2026' (जो 27 जनवरी 2026 से प्रभावी है) को जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू करना है। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सटीक डेटा ही शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का आधार है।

अस्पताल में ही मिलेगी सुविधा:

अब राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चा और मां के डिस्चार्ज होने से पहले ही जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें सौंप दिया जाए। इसके लिए 21 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा तय की गई है।

डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था:

  • निशुल्क सेवा: पंजीकरण के बाद प्रथम प्रमाण पत्र 7 दिनों के भीतर पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जाएगा।

  • CRS-ORGI पोर्टल: अब सभी पंजीकरण एकीकृत पोर्टल के माध्यम से होंगे, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।

  • आधार लिंकेज: जन्म प्रमाण पत्र के साथ ही बच्चे का आधार नंबर जनरेट करने की प्रक्रिया को भी जोड़ा जा रहा है।

  • डेटा माइग्रेशन: 2015 से 2022 तक के सभी पुराने अभिलेखों को डिजिटल रूप में NIC क्लाउड पर सुरक्षित माइग्रेट किया जा रहा है।

पंजीकरण की वर्तमान स्थिति (वर्ष 2025):

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ की प्रगति संतोषजनक है, लेकिन कुछ जिलों में विशेष अभियान की जरूरत बताई गई:

श्रेणीसकल पंजीयन दर (Gross Rate)शुद्ध पंजीयन दर (Net Rate)
जन्म पंजीयन108.4%71.7%
मृत्यु पंजीयन102.6%92.5%

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