छत्तीसगढ़ में महिलाओं और मासूम बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक भयावह और चिंताजनक तस्वीर उभरकर सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रदेश में हर दिन औसतन 30 महिलाएं रहस्यमय तरीके से गायब हो रही हैं, जिनमें से 10 से 12 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य में मानव तस्करी और अपहरण का सिंडिकेट कितनी गहराई से जड़े जमा चुका है।

आंकड़ों की ज़ुबानी, खौफ की कहानी: वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 के बीच के आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं:

  • कुल लापता: पिछले 3 वर्षों में 36,662 महिलाएं और बच्चियां गायब हुईं।

  • अनसुलझे मामले: इनमें से 7,188 का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

  • नाबालिगों पर प्रहार: 10,753 बालिकाएं सीधे तौर पर लापता हुईं, जबकि 11,825 को 'बहला-फुसलाकर' ले जाने के मामले दर्ज हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी की ओर इशारा करते हैं।

तस्करी के 'हॉटस्पॉट' और कारण: राज्य के सीमावर्ती जिले जैसे सरगुजा, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर और बस्तर तस्करों के सॉफ्ट टारगेट बने हुए हैं।

  1. बेरोजगारी और प्रवासन: गरीबी और काम की तलाश में पलायन करने वाली युवतियों को तस्कर ऊंचे वेतन का लालच देकर झांसे में लेते हैं।

  2. सप्लाई चेन: इन बच्चियों को दूसरे राज्यों में ले जाकर घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या घिनौने यौन शोषण के दलदल में धकेल दिया जाता है।

  3. जागरूकता की कमी: ग्रामीण अंचलों में शिक्षा और कानूनी जानकारी के अभाव का फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

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